मनुष्य श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़े: मधुरेश दास महाराज श्रीराम के वनवास प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर

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Safidon News
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : वेदाचार्य दंडी स्वामी डा. निगमबोध तीर्थ महाराज के परम सानिध्य में नगर की गुरुद्वारा गली स्थित श्री शिव शक्ति कृपा मंदिर में चल रहे सामूहिक संगीतमय श्री रामायण पाठ महोत्सव में श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर भगवान श्रीराम की कथा का श्रवण कर रहे हैं। महोत्सव के दौरान अयोध्या से पधारे व्यास मधुरेश दास महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। व्यास मधरेश दास महाराज ने श्रीराम वनवास प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, सत्य और कर्तव्य पालन का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के लिए राजपाट से अधिक महत्वपूर्ण अपने पिता के वचन की मर्यादा थी। जब उन्हें वनवास जाने का आदेश मिला तो उन्होंने बिना किसी विरोध के पिता के वचन को सर्वोपरि मानते हुए वन जाने का निर्णय लिया। महाराज ने कहा कि श्रीराम के वनवास का प्रसंग हमें यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को अपने कर्तव्य और संस्कारों से विचलित नहीं होना चाहिए। भगवान श्रीराम ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि सच्चे अर्थों में महान वही है, जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर परिवार, समाज और धर्म के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करे। कथा के दौरान श्रीराम के वन जाने की सूचना मिलने पर अयोध्या में छाए दुख और शोक का भी मार्मिक वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि भगवान श्रीराम के वनवास की बात सुनकर माता कौशल्या सहित अयोध्यावासी अत्यंत व्यथित हो गए। वहीं, माता सीता और भाई लक्ष्मण ने भी श्रीराम के साथ वन जाने का संकल्प लिया। इस प्रसंग को सुनाते हुए व्यास जी ने परिवार के प्रति प्रेम, समर्पण और साथ निभाने की भावना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि माता सीता का श्रीराम के साथ वन जाने का निर्णय उनके अटूट और दांपत्य धर्म का प्रतीक है। वहीं, लक्ष्मण का अपने बड़े भाई के साथ वन जाने का संकल्प भाईचारे, सेवा और त्याग की मिसाल प्रस्तुत करता है। इन प्रसंगों से वर्तमान समाज को परिवार में प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। व्यास मधरेश दास महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य के मार्ग पर चलें और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें।

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