हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह से जुड़े मामले में कानूनी प्रक्रिया के बीच महिला कोच ने चंडीगढ़ कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की है। महिला कोच ने मामले में रेप की कोशिश से संबंधित धारा जोड़ने की मांग की है। अर्जी पर कोर्ट की आगामी सुनवाई और आदेश महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल यह एक कानूनी मांग है और धारा जोड़ने पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
संदीप सिंह के खिलाफ महिला कोच की शिकायत से जुड़ा मामला लंबे समय से अदालत में विचाराधीन है। मामले में शिकायतकर्ता और बचाव पक्ष की ओर से अलग-अलग कानूनी दलीलें रखी जा रही हैं।
अब महिला कोच की ओर से दाखिल नई अर्जी के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
महिला कोच का पक्ष है कि मामले में सामने आए तथ्यों और आरोपों को देखते हुए रेप की कोशिश से संबंधित कानूनी प्रावधान भी जोड़ा जाना चाहिए।
कोर्ट अब अर्जी में दिए गए आधार और मामले के रिकॉर्ड को देखने के बाद आगे की प्रक्रिया तय कर सकती है।
इस मांग पर आरोपी पक्ष को जवाब देने का अवसर भी मिल सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत तय करेगी कि संबंधित धारा जोड़ने का पर्याप्त कानूनी आधार बनता है या नहीं।
यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि अर्जी दाखिल होने मात्र से संबंधित आरोप साबित नहीं हो जाते और न ही मांगी गई धारा स्वतः मामले में शामिल हो जाती है।
आपराधिक मामले में आरोप और अपराध की कानूनी धाराएं अदालत में उपलब्ध रिकॉर्ड, जांच सामग्री और लागू कानून के आधार पर तय होती हैं।
महिला कोच ने इससे पहले संदीप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामले में पुलिस जांच के बाद कानूनी प्रक्रिया अदालत तक पहुंची।
संदीप सिंह की ओर से आरोपों का विरोध किया जाता रहा है। इसलिए मामले से जुड़े आरोपों को अदालत का अंतिम निर्णय आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
नई अर्जी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभियोजन और बचाव पक्ष कोर्ट में क्या दलील देते हैं।
यदि अदालत महिला कोच की मांग स्वीकार करती है तो मामले में आरोपों का कानूनी दायरा बदल सकता है। यदि कोर्ट को पर्याप्त आधार नहीं मिलता है तो अर्जी खारिज भी की जा सकती है।
मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में रहा है क्योंकि संदीप सिंह हरियाणा सरकार में खेल मंत्री रह चुके हैं।
महिला कोच से जुड़ा मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सरकार और पूर्व मंत्री पर सवाल उठाए थे। दूसरी तरफ मामले की कानूनी प्रक्रिया अदालत में चलती रही।
अब पूरे मामले का केंद्र कोर्ट में उपलब्ध साक्ष्य और दोनों पक्षों की कानूनी दलीलें हैं।
अदालत में किसी नई धारा को जोड़ने के लिए आरोपों की प्रकृति और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखा जाता है। इसलिए महिला कोच की अर्जी पर होने वाली सुनवाई मामले में महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकती है।
अदालत यदि आवश्यक समझती है तो मामले के रिकॉर्ड और जांच से संबंधित दस्तावेजों पर भी विचार कर सकती है।
इस दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
फिलहाल हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह से जुड़े मामले में महिला कोच ने चंडीगढ़ कोर्ट में अर्जी देकर रेप की कोशिश से संबंधित धारा जोड़ने की मांग की है। यह मांग अभी न्यायिक विचार के अधीन है। कोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामले में संबंधित धारा जोड़ी जाएगी या मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत ही सुनवाई आगे बढ़ेगी।
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