हरियाणा में सस्पेंडेड सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) तंवर की मौत के मामले में दर्ज FIR की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने मामले में तीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, लेकिन FIR में आरोपियों से संबंधित कॉलम फिलहाल खाली रखा गया है। दूसरी ओर मृतक के भाई ने 12 अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा है कि कार्रवाई होने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।
SE तंवर का शव करनाल में एक कार के अंदर मिला था। प्रारंभिक तौर पर मामला कथित आत्महत्या का बताया गया था। इसके बाद घटनास्थल से मिले कथित नोट और उसमें अधिकारियों के नामों के जिक्र को लेकर मामला गंभीर हो गया।
अब FIR सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि FIR में तीन धाराएं लगाई गई हैं। हालांकि आरोपियों वाले कॉलम में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है।
FIR में आरोपी का कॉलम खाली होने का अर्थ यह नहीं है कि जांच में किसी व्यक्ति का नाम बाद में शामिल नहीं किया जा सकता। पुलिस उपलब्ध शिकायत, कथित नोट, डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।
दूसरी ओर मृतक के भाई ने 12 अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।
परिवार की ओर से कहा गया है कि पहले संबंधित अधिकारियों की गिरफ्तारी की जाए, उसके बाद ही मृतक का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
हालांकि परिजनों द्वारा जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी कानूनी जिम्मेदारी पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित होगी।
मामले में कथित तौर पर मिले नोट की जांच भी बेहद महत्वपूर्ण है।
पुलिस को यह सत्यापित करना होगा कि नोट वास्तव में मृतक ने ही लिखा था या नहीं। इसके लिए हैंडराइटिंग की जांच कराई जा सकती है। साथ ही उसमें लिखे गए आरोपों के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेजों और घटनाक्रम की भी पड़ताल जरूरी होगी।
मृतक के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, ईमेल और विभागीय पत्राचार से भी जांच को महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
यह पता लगाया जा सकता है कि मौत से पहले तंवर किन लोगों के संपर्क में थे और उन्होंने अपनी नौकरी, निलंबन या अन्य विभागीय मामलों को लेकर किसी से बातचीत की थी या नहीं।
SE तंवर अपने एक विवादित बयान के बाद चर्चा में आए थे और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होने की बात सामने आई थी। उनकी मौत रिटायरमेंट के समय हुई, जिसके कारण सेवा से जुड़े पुराने घटनाक्रम भी अब जांच के केंद्र में आ सकते हैं।
पुलिस के लिए परिजनों के आरोपों के साथ उन अधिकारियों का पक्ष लेना भी महत्वपूर्ण होगा, जिनका नाम शिकायत, नोट या अन्य दस्तावेजों में सामने आता है।
किसी व्यक्ति का नाम शिकायत या कथित नोट में होना अपने आप अपराध सिद्ध नहीं करता। गिरफ्तारी सहित आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जांच में संबंधित साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल SE तंवर की मौत के मामले में तीन धाराओं के तहत FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है और आरोपियों वाला कॉलम खाली बताया जा रहा है। वहीं परिवार ने 12 अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए अंतिम संस्कार को कार्रवाई से जोड़ दिया है। अब पुलिस जांच, कथित नोट की सत्यता और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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