दिल्ली ब्लास्ट मामले में खुलासा
दिल्ली ब्लास्ट की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी मॉड्यूल की पूरी कार्यशैली का विस्तृत खाका मिला है। जांच में सामने आया कि यह मॉड्यूल एक सुसंगठित नेटवर्क की तरह काम करता था, जिसमें हर व्यक्ति की भूमिका पहले से निर्धारित थी और सभी सदस्य अपने-अपने काम को गोपनीय तरीके से अंजाम देते थे।
मुख्य आरोपी मुजम्मिल मॉड्यूल में रिक्रूटमेंट की जिम्मेदारी संभालता था। वह उन युवाओं को निशाना बनाता था जिन्हें आसानी से प्रभावित किया जा सके या जो किसी सामाजिक, आर्थिक या धार्मिक वजह से असंतोष में हों। मुजम्मिल पहले उन्हें भरोसे में लेता और फिर धीरे-धीरे मॉड्यूल की तरफ खींचता था।
दूसरी ओर, शाहीन की भूमिका मानसिक रूप से तैयार करने की थी। उसके बारे में जांच में पता चला है कि वह नए भर्ती हुए लोगों को धार्मिक भावनाओं और वैचारिक प्रचार के जरिए ब्रेनवॉश करती थी। वह उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश करती थी कि उनका कदम किसी बड़े मकसद का हिस्सा है। शाहीन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संपर्क बनाए रखती थी।
मॉड्यूल का तीसरा प्रमुख सदस्य नबी ऑपरेशनल फैसले लेता था। वह तय करता था कि किस व्यक्ति से किस तरह का काम लेना है—चाहे वह ब्लास्ट की तैयारी हो, रेकी हो, सामग्री जुटाना हो या संदेश पहुंचाना। नबी ही पूरी गतिविधि को चरणबद्ध तरीके से संचालित करता था और सदस्यों के बीच सीधी बातचीत कम से कम रखता था ताकि नेटवर्क सुरक्षित रहे।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि समय रहते इस मॉड्यूल का पर्दाफाश नहीं होता, तो यह नेटवर्क दिल्ली सहित कई अन्य शहरों में गंभीर घटनाओं को अंजाम दे सकता था। अब मामले में कई अहम गिरफ्तारी और पूछताछ जारी है।
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