हाई-प्रोफाइल घूस मामले में बड़ा झटका, कोर्ट से नहीं मिली राहत

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Bribery Case

सीबीआई अदालत का सख्त रुख, आरोपी की अर्जी नामंजूर

चंडीगढ़ में 10 लाख रुपये की रिश्वत से जुड़े चर्चित मामले में आरोपी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपी द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में आरोपी ने मांग की थी कि जांच एजेंसी जिन दस्तावेजों को अपने रिकॉर्ड में रखे हुए है, उनकी प्रतियां उसे उपलब्ध कराई जाएं। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन दस्तावेजों पर अभियोजन पक्ष भरोसा नहीं कर रहा, उनकी कॉपी देना अनिवार्य नहीं है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत केवल उन्हीं दस्तावेजों की प्रतियां देना जरूरी होता है, जिन्हें अभियोजन सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने का इरादा रखता है। ऐसे दस्तावेज, जिन्हें जांच एजेंसी ने केवल आंतरिक जांच या संदर्भ के लिए रखा है और जिन पर केस टिकाया नहीं जा रहा, उन्हें साझा करना कानूनन आवश्यक नहीं है।

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए सभी दस्तावेजों की जानकारी मिलना उसका अधिकार है। हालांकि, सीबीआई की ओर से तर्क दिया गया कि सभी दस्तावेज सबूत के दायरे में नहीं आते और गैर-प्रासंगिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराना जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने एजेंसी की दलीलों से सहमति जताई।

यह मामला कथित तौर पर 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और लेने से जुड़ा है, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। जांच के दौरान ट्रैप, कॉल रिकॉर्ड, लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए थे। आरोपी की ओर से बार-बार कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए राहत पाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन ताजा आदेश से उसे झटका लगा है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश भविष्य के मामलों के लिए भी अहम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच एजेंसियों को हर उस दस्तावेज की प्रति देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जिसे वे सबूत के रूप में पेश ही नहीं कर रहीं। कोर्ट का यह रुख भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को मजबूती देता है।

फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और आने वाली सुनवाइयों में आगे की कार्रवाई तय होगी।

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