उबलते रंगों के बीच निभती सदियों पुरानी अनोखी होली

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Noultha village

नौल्था गांव में ‘डाट’ की परंपरा—कड़ाहों में तैयार रंग, जोखिम के बावजूद कायम आस्था

फाल्गुन मास में जहां देशभर में रंगों का उत्सव उमंग के साथ मनाया जाता है, वहीं प्रदेश के एक गांव में होली की एक अलग और रोमांचकारी परंपरा आज भी जीवित है। नौल्था गांव की ‘डाट होली’ अपने अनोखे अंदाज के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। इस परंपरा में बड़े-बड़े कड़ाहों में रंग तैयार किया जाता है, जिसे गर्म अवस्था में ही उत्सव का हिस्सा बनाया जाता है।

रिवाज के अनुसार युवक समूह बनाकर एक-दूसरे को धक्का देते हुए रंग के कड़ाहों के पास पहुंचते हैं, जबकि महिलाएं ऊपर से गर्म रंग फेंकती हैं। यह दृश्य देखने में जितना उत्साहपूर्ण लगता है, उतना ही जोखिम भरा भी माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे गांव की पहचान के रूप में देखा जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, इस आयोजन के पीछे सामाजिक एकता और साहस का प्रतीकात्मक संदेश जुड़ा है। हालांकि, समय-समय पर दुर्घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें गंभीर झुलसने या जान जाने की घटनाएं शामिल रही हैं। बावजूद इसके, परंपरा को बंद करने की मांग कभी व्यापक समर्थन नहीं जुटा सकी। गांव के बुजुर्ग मानते हैं कि यह आयोजन श्रद्धा, सामूहिकता और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ है।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा प्रबंधों और सतर्कता को लेकर निर्देश दिए जाते हैं, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी ऐसे आयोजनों में सावधानी बरतने और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रखने की सलाह देते हैं।

‘डाट होली’ केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि ग्रामीण परंपरा, सामुदायिक सहभागिता और साहस का प्रतीक मानी जाती है, जो बदलते समय में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

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