फाग महोत्सव की धूम; अबीर-गुलाल और गीत-संगीत से सजी गलियां
फाल्गुन के उल्लास के साथ शहर में रंगोत्सव की धूम देखने को मिली। गलियों और चौकों पर सुबह से ही लोगों की टोलियां जुटनी शुरू हो गईं। एक-दूसरे को रंग लगाकर और अबीर-गुलाल उड़ाकर नागरिकों ने पारंपरिक उत्साह का प्रदर्शन किया। वातावरण में ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुनों की गूंज रही, जिस पर युवा वर्ग जमकर थिरकता नजर आया।
स्थानीय मोहल्लों में सामूहिक आयोजन किए गए, जहां बुजुर्गों ने पारंपरिक फाग गीत गाकर उत्सव की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखा। महिलाओं और बच्चों ने भी पूरे उत्साह से भाग लिया। कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों ने जलपान और ठंडाई की व्यवस्था कर आपसी मेलजोल को बढ़ावा दिया।
त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी सक्रिय रही। प्रशासन ने पहले से ही शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की थी, जिसका सकारात्मक असर दिखाई दिया। कहीं भी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
रंगों के इस पर्व ने आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ शामिल हुए और गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया। पारंपरिक रस्मों के साथ आधुनिक अंदाज का समन्वय इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सामूहिक आयोजन सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं।
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