मध्य-पूर्व के कई खाड़ी देश संभावित न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारियों में जुट गए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी से बड़ी मात्रा में विशेष कैप्सूल की सप्लाई को लेकर जानकारी मांगी है। बताया जा रहा है कि कंपनी से करीब 1 करोड़ कैप्सूल तैयार करने की क्षमता के बारे में पूछा गया है।
सूत्रों के अनुसार ये कैप्सूल न्यूक्लियर रेडिएशन से बचाव में इस्तेमाल होने वाली दवाओं से जुड़े हो सकते हैं। खाड़ी देशों ने यह भी जानना चाहा है कि कंपनी कितने समय में इतनी बड़ी मात्रा में दवा तैयार कर सकती है और क्या वह जरूरत पड़ने पर अलग-अलग देशों में सप्लाई कर पाएगी।
जानकारी के मुताबिक, चंडीगढ़ की इस फार्मा कंपनी के पास बड़े पैमाने पर दवा उत्पादन की सुविधा है। कंपनी से यह भी पूछा गया है कि अगर अचानक मांग बढ़ती है तो वह उत्पादन बढ़ाकर कितनी जल्दी दवाइयों की आपूर्ति कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच कई देश न्यूक्लियर आपातकाल से निपटने के लिए मेडिकल तैयारी मजबूत कर रहे हैं। इसी वजह से रेडिएशन से बचाव में उपयोग होने वाली दवाओं की मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो चंडीगढ़ की यह कंपनी न केवल खाड़ी देशों बल्कि अन्य देशों को भी इन कैप्सूल की सप्लाई कर सकती है। इससे भारत के फार्मा सेक्टर को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मौका मिल सकता है।
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