जेलों में सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ नशे की बढ़ती समस्या पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब जो भी कैदी पैरोल या फरलो पर बाहर जाने के बाद जेल में वापस लौटेंगे, उनकी 24 घंटे के भीतर मेडिकल जांच कराना अनिवार्य होगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेल में कोई भी बंदी नशे की हालत में प्रवेश न करे और अन्य कैदियों के लिए खतरा न बने। हालिया आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 352 कैदी नशे की लत से प्रभावित पाए गए हैं, जो जेल प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
नई SOP के तहत जेल में लौटने वाले हर कैदी की स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जांच की जाएगी। इसमें नशे से संबंधित टेस्ट भी शामिल होंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं बंदी ने बाहर रहते हुए किसी प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन तो नहीं किया। यदि कोई कैदी नशे में पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और उसे विशेष निगरानी में रखा जाएगा।
जेल प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल जेल के अंदर अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि कैदियों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही, नशे की प्रवृत्ति को कम करने और पुनर्वास प्रक्रिया को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।
यह नई व्यवस्था जेलों में पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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