पानीपत में यमुना नदी किनारे एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। डूब रहे बच्चों को बचाने के प्रयास में एक युवक और उसके चाचा की जान चली गई। घटना के बाद गांव और आसपास के इलाकों में मातम का माहौल है, जबकि लोगों ने दोनों की बहादुरी और मानवता की मिसाल को याद किया।
जानकारी के अनुसार, कुछ बच्चे नदी में नहाने या खेलने के दौरान गहरे पानी की ओर चले गए और डूबने लगे। बच्चों को संकट में देख एक युवक बिना देर किए उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद पड़ा। उसने अपनी जान की परवाह किए बिना एक-एक कर बच्चों तक पहुंचने की कोशिश की।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक ने साहस दिखाते हुए दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन जब वह तीसरे बच्चे को बचाने का प्रयास कर रहा था, तब पानी के तेज बहाव और गहराई के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया। उसे संघर्ष करते देख उसका चाचा भी मदद के लिए नदी में उतर गया।
हालात तेजी से बिगड़ते चले गए और दोनों गहरे पानी में फंस गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। बाद में खोजबीन और राहत कार्य के दौरान दोनों को बाहर निकाला गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पूरे गांव में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक ने जिस साहस और निस्वार्थ भावना का परिचय दिया, वह हमेशा याद रखा जाएगा। उसने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जिंदगी बचाने की कोशिश की और दो बच्चों को नया जीवन भी दिया।
यह हादसा नदी, नहर और अन्य जल स्रोतों के पास सावधानी बरतने की आवश्यकता की भी याद दिलाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को ऐसे स्थानों पर बिना निगरानी के नहीं जाने देना चाहिए और जल सुरक्षा के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
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