रोहतक स्थित प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान में इन दिनों मरीजों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में डॉक्टरों के अवकाश पर होने के कारण अस्पताल की ओपीडी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है। इसका सीधा असर रोजाना इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है।
सुबह से ही अस्पताल में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई मरीजों का कहना है कि उन्हें डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। विशेष रूप से दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें समय और संसाधनों दोनों की चुनौती झेलनी पड़ रही है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई हैं। उपलब्ध चिकित्सकों और अनुबंध पर कार्यरत फैकल्टी सदस्यों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं मिलती रहें। हालांकि मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले उपलब्ध स्टाफ पर कार्यभार काफी बढ़ गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों की उपलब्धता और ड्यूटी प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि एक साथ बड़ी संख्या में चिकित्सक अवकाश पर हों, तो इसका प्रभाव सीधे मरीजों की सेवाओं पर पड़ता है। ऐसे में बेहतर समन्वय और संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से ओपीडी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में देरी से कई गंभीर मरीजों को परेशानी हो सकती है। वहीं प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं जारी हैं, लेकिन बढ़ते दबाव के कारण मरीजों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
![]()











