हॉर्मुज संकट में फंसा हरियाणा का 1 लाख टन बासमती चावल, निर्यात पर ब्रेक; ₹1000 करोड़ के नुकसान का दावा

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HaryanaNews

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग संकट का सीधा असर हरियाणा के बासमती चावल कारोबार पर पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर जाने वाली करीब 1 लाख टन चावल की खेप बंदरगाहों पर अटक गई, जिससे निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।

हॉर्मुज स्ट्रेट खाड़ी देशों तक पहुंचने वाले समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके प्रभावित होने से भारत से ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई बाजारों को जाने वाले बासमती चावल की सप्लाई बाधित हुई है। कई निर्यातकों को माल की डिलीवरी, भुगतान और शिपिंग लागत को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

हरियाणा और पंजाब देश के प्रमुख बासमती उत्पादक और निर्यातक क्षेत्र हैं। ऐसे में समुद्री मार्ग में रुकावट का असर सीधे राइस मिलर्स, निर्यातकों और किसानों तक पहुंच सकता है। हरियाणा में करीब 20 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का उत्पादन होने का अनुमान है।

निर्यातकों के अनुसार, पहले से भेजी गई खेपों के फंसने के अलावा नए ऑर्डर पर भी असर पड़ा है। युद्ध और समुद्री मार्ग की अनिश्चितता के कारण बीमा तथा माल ढुलाई की लागत बढ़ने की आशंका है। इससे भारतीय बासमती की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, ₹1000 करोड़ के नुकसान का आंकड़ा संबंधित निर्यातकों का दावा है, जिसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अलग से जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग समय पर फंसे माल और संभावित नुकसान के आंकड़े अलग रहे हैं। 2026 में सामने आई रिपोर्टों में भारत के कुल बासमती कार्गो के करीब 4 लाख टन तक फंसे होने की बात भी कही गई है।

निर्यातकों की नजर अब हॉर्मुज मार्ग की स्थिति और वैकल्पिक शिपिंग रूट पर है। लंबे समय तक संकट जारी रहने पर बासमती की कीमतों, किसानों की मांग और निर्यात कारोबार पर और दबाव पड़ सकता है।

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