हरियाणा के रोहतक में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए पंचायती भूमि के इस्तेमाल को लेकर नए नियम लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन नियमों के तहत पात्र स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को पंचायती भूमि पट्टे पर लेने का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए जगह उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था के तहत स्वयं सहायता समूह पंचायत की जमीन को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पट्टे पर ले सकेंगे। इस जमीन का इस्तेमाल समूह की जरूरत और स्वीकृत गतिविधियों के अनुसार किया जा सकेगा। महिलाओं को खासतौर पर डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलेगा।
डेयरी व्यवसाय शुरू होने से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को नियमित आय का साधन मिल सकता है। महिलाएं जमीन का इस्तेमाल पशुपालन और दूध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों के लिए कर सकेंगी। इससे समूह की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
पंचायती भूमि का आवंटन निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए संबंधित पंचायत और प्रशासनिक विभागों की ओर से प्रक्रिया तय की जाएगी। इच्छुक स्वयं सहायता समूहों को आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित शर्तों को पूरा करना होगा।
इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर व्यवसायिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर भी मिलेगा। डेयरी के अलावा नियमों के तहत अन्य स्वीकृत गतिविधियों के लिए भी जमीन के इस्तेमाल की संभावना हो सकती है।
प्रशासन की ओर से योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र महिलाओं तक पहुंचाने पर जोर दिया जा सकता है। स्वयं सहायता समूहों को आवेदन प्रक्रिया, पट्टे की शर्तों और जमीन के उपयोग से जुड़े नियमों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
रोहतक में इस पहल से जुड़ी महिलाओं को अब अपने व्यवसाय के लिए जमीन की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा मिल सकता है।
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