पंजाब के IAS अधिकारी पर टेंडर प्रक्रिया में दखल का आरोप, ED ने DGP से FIR की मांग की

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के एक IAS अधिकारी पर सरकारी टेंडर प्रक्रिया को कथित तौर पर प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं। ED ने इस मामले में पंजाब के DGP को पत्र भेजकर FIR दर्ज करने की मांग की है। जांच के दौरान हुई छापेमारी में कथित तौर पर कुछ WhatsApp चैट भी सामने आने की बात कही गई है।

ED की ओर से भेजे गए पत्र में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कुछ तथ्यों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी का आरोप है कि IAS अधिकारी ने सरकारी टेंडर को प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

जानकारी के अनुसार, ED की कार्रवाई के दौरान कुछ डिजिटल सामग्री भी जांच एजेंसी के हाथ लगी। इनमें WhatsApp पर हुई बातचीत से जुड़े रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं। एजेंसी इन चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।

ED ने पंजाब पुलिस के DGP को पत्र भेजकर मामले में FIR दर्ज करने का अनुरोध किया है। एजेंसी का मानना है कि सामने आए तथ्यों की पुलिस स्तर पर भी जांच जरूरी है। FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ सकती है।

टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि टेंडर जारी करने से लेकर प्रक्रिया पूरी होने तक किन अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका रही।

WhatsApp चैट को लेकर भी जांच की जा रही है। यदि डिजिटल बातचीत में टेंडर प्रक्रिया से संबंधित कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है तो उसे जांच में साक्ष्य के तौर पर देखा जा सकता है।

ED की कार्रवाई के बाद पंजाब के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सरकारी टेंडर प्रक्रिया में किसी अधिकारी की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि टेंडर से जुड़े निर्णय नियमों के अनुसार लिए गए थे या किसी व्यक्ति अथवा कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

मामले में संबंधित विभाग के रिकॉर्ड, फाइलों और अधिकारियों के बीच हुए संचार की जांच भी संभव है। इसके अलावा टेंडर में शामिल कंपनियों और उनकी भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है।

ED की ओर से FIR की मांग किए जाने के बाद अब पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर नजर है। FIR दर्ज होने की स्थिति में पुलिस संबंधित आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच करेगी।

वहीं, संबंधित IAS अधिकारी की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। इसलिए अभी मामले में ED की ओर से लगाए गए आरोपों को जांच के दायरे में मौजूद आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सरकारी टेंडर से जुड़े मामलों में दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां WhatsApp चैट, सरकारी फाइलों और अन्य रिकॉर्ड को आपस में मिलाकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर सकती हैं।

ED की कार्रवाई के बाद मामले में आगे और लोगों से पूछताछ या अन्य दस्तावेजों की जांच की संभावना भी बनी हुई है। जांच आगे बढ़ने के साथ टेंडर प्रक्रिया से जुड़े पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल ED ने पंजाब के DGP से FIR दर्ज करने की मांग की है और जांच के दौरान मिली WhatsApp चैट को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है। अब पंजाब पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच पर सभी की नजर बनी हुई है।

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