पंचकूला में डॉग बाइट के बढ़ते मामलों से चिंता, निगम ने आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए बनाया मल्टी-एजेंसी प्लान

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Panchkula News

पंचकूला में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और डॉग बाइट के मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में जिले में कुत्तों के काटने के करीब 7,600 मामले सामने आए हैं। वहीं पिछले वर्ष डॉग बाइट के 14,230 मामले दर्ज किए गए थे। लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए नगर निगम ने आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए मल्टी-एजेंसी प्लान तैयार किया है।

नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ-साथ लोगों को डॉग बाइट की घटनाओं से सुरक्षित रखना है।

अधिकारियों के अनुसार, आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। खुले में फेंका जाने वाला भोजन और कूड़ा कुत्तों को आबादी वाले इलाकों की ओर आकर्षित करता है। ऐसे में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की पहचान, नसबंदी और टीकाकरण जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा सकता है। इसके लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान चलाने की तैयारी है।

शहर के उन इलाकों की पहचान की जाएगी जहां डॉग बाइट के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। इन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।

डॉग बाइट के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों में भी चिंता का माहौल है। खासकर सुबह और शाम के समय पैदल चलने वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को आवारा कुत्तों के झुंड से परेशानी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

प्रशासन की कोशिश है कि आवारा कुत्तों के नियंत्रण के साथ लोगों की सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाया जाए। इसके लिए नियमों के अनुसार ही कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया जाएगा।

नगर निगम की योजना में संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारियां तय करने और नियमित निगरानी की व्यवस्था शामिल की जा सकती है। अभियान के दौरान पकड़े जाने वाले कुत्तों के रिकॉर्ड और उनके टीकाकरण तथा नसबंदी की जानकारी भी रखी जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आवारा कुत्तों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। कचरा प्रबंधन, नसबंदी, टीकाकरण और लोगों में जागरूकता जैसे कदम एक साथ उठाने की जरूरत है।

लोगों से भी अपील की जा सकती है कि वे खुले में कचरा और भोजन न डालें। इससे आवारा कुत्तों की संख्या वाले क्षेत्रों में भीड़ कम करने में मदद मिल सकती है।

डॉग बाइट की घटना होने पर लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता लेने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार कराने की जरूरत होती है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में जागरूकता अभियान भी चलाया जा सकता है।

पंचकूला में पिछले छह महीनों में 7,600 मामले सामने आने और पिछले साल 14,230 मामलों के आंकड़े ने समस्या की गंभीरता को सामने रखा है। इन आंकड़ों के बाद नगर निगम की नई योजना पर लोगों की नजर बनी हुई है।

मल्टी-एजेंसी प्लान के जरिए नगर निगम विभिन्न विभागों और संस्थाओं के सहयोग से समस्या पर नियंत्रण पाने का प्रयास करेगा। आने वाले समय में अभियान की प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि डॉग बाइट के मामलों में कितनी कमी आती है।

फिलहाल नगर निगम ने आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए समन्वित कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया है। लोगों को उम्मीद है कि प्रभावी तरीके से योजना लागू होने पर शहर में डॉग बाइट की घटनाओं में कमी आएगी और सार्वजनिक सुरक्षा बेहतर होगी।

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