गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान एक युवक की मौत के बाद बिल को लेकर परिवार और अस्पताल के बीच विवाद का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने बकाया बिल के कारण युवक का शव उन्हें नहीं सौंपा। परिवार का दावा है कि इलाज के दौरान करीब 23 लाख रुपये पहले ही जमा कराए जा चुके थे, जबकि बाद में लगभग 18 लाख रुपये और बकाया बताए गए। मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष की एक सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में है।
परिवार के अनुसार युवक का मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद जब परिजनों ने शव सौंपने की प्रक्रिया शुरू की तो बिल को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
परिजनों का दावा है कि वे अस्पताल को करीब 23 लाख रुपये का भुगतान कर चुके थे।
इसके बावजूद उन्हें लगभग 18 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि बकाया बताए जाने की बात कही गई। परिवार का आरोप है कि इस राशि का भुगतान नहीं होने के कारण अस्पताल ने युवक का शव सौंपने से इनकार कर दिया।
ये आरोप फिलहाल परिवार की ओर से किए गए दावे हैं। अस्पताल का विस्तृत आधिकारिक पक्ष और बिल का पूरा रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही भुगतान तथा बकाया राशि से जुड़ी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मामले ने उस समय और ध्यान खींचा जब NHRC अध्यक्ष की ओर से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया सामने आने की बात कही गई।
उनकी पोस्ट में कथित तौर पर कहा गया, “मैं अस्पताल का इलाज करने जा रहा हूं।” इस टिप्पणी को मामले में हस्तक्षेप या संज्ञान लेने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि आयोग की ओर से की गई औपचारिक कार्रवाई की स्थिति आधिकारिक आदेश या बयान से ही स्पष्ट होगी।
अस्पताल में मरीज की मौत के बाद शव सौंपने को बिल भुगतान से जोड़ने का आरोप संवेदनशील विषय है।
ऐसे मामले में यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि अस्पताल ने वास्तव में शव सौंपने से इनकार किया था या दस्तावेजी अथवा किसी अन्य प्रक्रिया के कारण देरी हुई।
परिवार द्वारा किए गए भुगतान की रसीदें, अस्पताल का अंतिम बिल, इलाज से संबंधित खर्च और बकाया राशि का विवरण इस विवाद के महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकते हैं।
यदि संबंधित प्रशासनिक या स्वास्थ्य अधिकारी मामले की जांच करते हैं तो दोनों पक्षों से रिकॉर्ड लेकर घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती है।
यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि युवक की मौत के बाद परिवार को शव कब मांगा गया, अस्पताल की ओर से क्या जवाब दिया गया और बाद में शव कब सौंपा गया।
मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। परिवार के आरोपों को अस्पताल की प्रतिक्रिया के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
निजी अस्पतालों में महंगे इलाज और बिलिंग को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में मरीज या परिजनों को उपचार के खर्च, जमा राशि और बकाया बिल की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है।
फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पर परिवार ने बकाया बिल के कारण युवक का शव नहीं सौंपने का आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि करीब 23 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे और अस्पताल ने लगभग 18 लाख रुपये और बकाया बताए। NHRC अध्यक्ष की सोशल मीडिया प्रतिक्रिया के बाद मामला चर्चा में है। अस्पताल के आधिकारिक पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड से पूरे घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट होगी।
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