हिसार में एक मोबाइल शॉप मालिक को कथित तौर पर धमकी देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अज्ञात लोगों ने गाड़ी से एक पर्ची फेंकी, जिसमें चल रहे मामले को खत्म करने की चेतावनी दी गई। ऐसा नहीं करने पर गोली चलाने की धमकी लिखी होने की बात कही जा रही है। घटना का संबंध एक RTI एक्टिविस्ट से जुड़े मामले से बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार मोबाइल शॉप मालिक के पास एक धमकी भरी पर्ची पहुंची। बताया जा रहा है कि इसे गाड़ी में सवार कुछ लोग फेंककर चले गए।
पर्ची में कथित तौर पर चेतावनी दी गई कि यदि संबंधित मामला खत्म नहीं किया गया तो गोलियां चलाई जाएंगी। इस तरह की धमकी सामने आने के बाद पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मामले की सूचना पुलिस को दिए जाने के बाद जांच में सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर्ची फेंकने वाले लोगों और इस्तेमाल किए गए वाहन की पहचान करना होगा।
घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज से वाहन के नंबर, आने-जाने के रास्ते और उसमें सवार लोगों के बारे में सुराग मिल सकता है। पुलिस पर्ची को भी साक्ष्य के तौर पर जांच सकती है।
प्रारंभिक जानकारी में धमकी का संबंध एक RTI एक्टिविस्ट से जुड़े विवाद या मामले से बताया जा रहा है।
हालांकि दोनों घटनाओं के बीच वास्तविक संबंध क्या है और धमकी देने वाले लोगों का उद्देश्य क्या था, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। केवल पर्ची में लिखी बात या पुराने विवाद के आधार पर किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
पुलिस यह भी जांच सकती है कि मोबाइल शॉप मालिक का RTI एक्टिविस्ट से जुड़े मामले में क्या संबंध है और क्या इससे पहले भी उसे किसी तरह की धमकी, दबाव या संदिग्ध गतिविधि का सामना करना पड़ा था।
यदि पहले फोन कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया के माध्यम से धमकियां मिली हों तो उनका डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
धमकी में गोली चलाने जैसी बात लिखे होने के कारण मामले को सुरक्षा के नजरिए से गंभीर माना जा रहा है। पीड़ित की शिकायत और खतरे की प्रकृति के आधार पर पुलिस आवश्यक सुरक्षा उपायों पर भी विचार कर सकती है।
इसके साथ ही संदिग्ध वाहन की पहचान के लिए शहर के प्रमुख रास्तों, बाजार और आसपास के इलाकों के कैमरों की फुटेज खंगाली जा सकती है।
फिलहाल हिसार में मोबाइल शॉप मालिक को पर्ची के जरिए गोली चलाने की धमकी देने का आरोप सामने आया है। मामला एक RTI एक्टिविस्ट से जुड़े प्रकरण से संबंधित बताया जा रहा है, लेकिन इस संबंध की आधिकारिक पुष्टि जांच से ही होगी। पुलिस के लिए CCTV फुटेज, पर्ची और पुराने विवाद से जुड़े रिकॉर्ड पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में अहम साबित हो सकते हैं।
![]()











