महेंद्रगढ़ में रिटायर्ड टीचर से ₹1.90 लाख की साइबर ठगी, WhatsApp पर APK फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने का आरोप

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Mahendragarh News

महेंद्रगढ़ में एक रिटायर्ड शिक्षक से करीब 1.90 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि साइबर ठगों ने WhatsApp पर एक APK फाइल भेजी, जिसे मोबाइल में इंस्टॉल करने के बाद फोन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए खाते से करीब 1.90 लाख रुपये निकाल लिए गए।

जानकारी के अनुसार रिटायर्ड शिक्षक के WhatsApp पर एक APK फाइल आई थी। बताया जा रहा है कि फाइल को सामान्य या जरूरी एप्लिकेशन समझकर मोबाइल में इंस्टॉल कर लिया गया।

इसके बाद मोबाइल की गतिविधियों में बदलाव होने और बैंक खाते से रकम निकलने का पता चला।

पीड़ित के खाते से चार ट्रांजेक्शन में कुल करीब 1.90 लाख रुपये निकाले जाने की बात सामने आई है।

अनधिकृत ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत संबंधित पुलिस और साइबर अपराध शाखा को दी।

अब जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि रकम किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों में ट्रांसफर हुई और वहां से उसे आगे कहां भेजा गया।

साइबर ठगी के मामलों में पैसे के डिजिटल ट्रेल को जल्द ट्रैक करना महत्वपूर्ण होता है। संदिग्ध खातों में रकम मौजूद होने की स्थिति में उन्हें फ्रीज कराने की कार्रवाई से पैसे की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।

APK एंड्रॉयड एप्लिकेशन इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। WhatsApp, SMS या अन्य माध्यम से अज्ञात स्रोत से भेजी गई APK फाइल को इंस्टॉल करना जोखिम भरा हो सकता है।

हानिकारक ऐप इंस्टॉल होने के बाद वह उपयोगकर्ता से SMS, कॉन्टैक्ट, नोटिफिकेशन या अन्य संवेदनशील अनुमतियां मांग सकता है। इन अनुमतियों का दुरुपयोग साइबर अपराधी बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के लिए कर सकते हैं।

हालांकि इस मामले में मोबाइल से वास्तव में किस तकनीकी तरीके से जानकारी हासिल की गई, इसकी पुष्टि डिजिटल फोरेंसिक जांच के बाद ही होगी।

पुलिस पीड़ित के मोबाइल, संदिग्ध APK फाइल, WhatsApp नंबर और बैंक ट्रांजेक्शन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।

जिन खातों में रकम गई है, उनके खाताधारकों और आगे हुए लेन-देन का पता लगाना भी जांच का अहम हिस्सा होगा।

साइबर अपराध से बचने के लिए किसी अनजान नंबर से मिली APK फाइल इंस्टॉल नहीं करनी चाहिए। बैंक, बिजली विभाग, कुरियर कंपनी या अन्य संस्था के नाम पर भेजे गए अनजान ऐप लिंक को भी आधिकारिक स्रोत से सत्यापित करना जरूरी है।

यदि किसी व्यक्ति के खाते से बिना अनुमति पैसे निकल जाएं तो बैंक को तुरंत सूचित करने के साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करना महत्वपूर्ण है। समय पर शिकायत करने से संदिग्ध ट्रांजेक्शन रोकने या रकम फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।

फिलहाल महेंद्रगढ़ में रिटायर्ड शिक्षक से चार ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 1.90 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। WhatsApp पर भेजी गई APK फाइल को इस ठगी से जोड़ा जा रहा है। पुलिस और साइबर टीम डिजिटल साक्ष्यों तथा रकम के ट्रांजेक्शन ट्रेल के आधार पर मामले की जांच कर सकती है।

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