हरियाणा में कमजोर पड़े मानसून के बीच एक बार फिर बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश के 10 जिलों में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। आज पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हरियाणा में बारिश का प्रभाव अधिक रहने की संभावना है। वहीं मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 22 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
आज पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल में बारिश का यलो अलर्ट है। बादलों की आवाजाही के साथ कुछ क्षेत्रों में बारिश होने से उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 5 सितंबर को बारिश का दायरा मध्य और दक्षिणी हरियाणा की तरफ बढ़ सकता है। झज्जर, गुरुग्राम, नूंह और रेवाड़ी समेत प्रदेश के 14 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।
हालांकि पश्चिमी हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी और जींद में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने का अनुमान है।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 3 सितंबर तक हरियाणा में 283.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है। इस अवधि में सामान्य तौर पर 364.6 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान अब तक करीब 22 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।
कम बारिश का असर जिलेवार आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश के सात जिले बारिश की कमी के मामले में रेड जोन में हैं। जींद में सामान्य से 56 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि सिरसा में 53 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इसी तरह कैथल और अंबाला में सामान्य से 50-50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। रोहतक में 45 प्रतिशत, करनाल में 43 प्रतिशत और पंचकूला में करीब 30 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
मानसून की सुस्ती के साथ प्रदेश के कई इलाकों में गर्मी और उमस भी लोगों को परेशान कर रही है। बीते दिन भिवानी 36.5 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा।
सिरसा में अधिकतम तापमान 36 डिग्री और हिसार में 35.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अंबाला में अधिकतम तापमान 34 डिग्री रहा, जबकि पानीपत और रोहतक में 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
रात के समय भी उमस का असर बना हुआ है। पिछले दिनों कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से एक से तीन डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया। अब संभावित बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री की गिरावट आने की संभावना है।
अगले दो दिनों की बारिश कृषि क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगी। मानसून की कमी के कारण कई जिलों में मिट्टी की नमी और फसलों की पानी की जरूरत को लेकर चिंता बनी हुई है। बारिश होने से किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।
फिलहाल प्रदेश में मानसून सीजन की बारिश सामान्य से 22 प्रतिशत कम है। ऐसे में 4 और 5 सितंबर को होने वाली संभावित बारिश से इस कमी में कुछ सुधार होने की उम्मीद है। लोगों को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने और बारिश व गरज-चमक के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह है।
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