रेवाड़ी : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का काफिला शनिवार देर रात गढ़ी बोलनी रोड पर करीब दो किलोमीटर तक बंद स्ट्रीट लाइटों के बीच से गुजरा। अमनगनी से रेजांगला पार्क के बीच स्ट्रीट लाइटें बंद होने के कारण पूरा हिस्सा अंधेरे में था। मुख्यमंत्री के काफिले का इस मार्ग से गुजरने का वीडियो सामने आने के बाद सड़क पर लगी लाइटों की देखरेख और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी रविवार को रेवाड़ी में आयोजित मैराथन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। वह एक दिन पहले शनिवार रात को ही रेवाड़ी आ गए थे। रात करीब साढ़े 11 बजे उनका काफिला गढ़ी बोलनी रोड से होते हुए PWD रेस्ट हाउस की ओर जा रहा था।
इसी दौरान अमनगनी से रेजांगला पार्क तक करीब दो किलोमीटर के हिस्से में स्ट्रीट लाइटें बंद मिलीं। सामने आए वीडियो में मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल गाड़ियां अंधेरे वाले हिस्से से गुजरती दिखाई दे रही हैं।
मामला सामने आने के बाद PWD और नगर परिषद के अधिकारियों से स्ट्रीट लाइटों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल किए गए, लेकिन दोनों विभागों की ओर से क्षेत्राधिकार को लेकर अलग-अलग स्थिति बताई गई।
PWD के एक्सईएन सत्येंद्र श्योराण ने बताया कि गढ़ी बोलनी रोड PWD के अधीन है, लेकिन स्ट्रीट लाइटों की जिम्मेदारी उनके विभाग के पास नहीं है। उनके अनुसार यह मामला नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है और नगर परिषद के अधिकारी ही इसके बारे में बेहतर जानकारी दे सकते हैं।
वहीं नगर परिषद के एक्सईएन अंकित वशिष्ट ने बताया कि रेजांगला पार्क तक का क्षेत्र नगर परिषद की सीमा में आता है और इसके आगे परिषद की सीमा समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि यदि लाइटों को PWD की ओर से हैंडओवर किया जा चुका है तो आगे की जिम्मेदारी संबंधित पंचायत के पास हो सकती है। अन्यथा इस बारे में PWD से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
अलग-अलग विभागों के जवाब के बीच बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों की वास्तविक देखरेख किसके जिम्मे है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने मुख्यमंत्री के काफिले का अंधेरे वाले मार्ग से गुजरना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि गढ़ी बोलनी रोड पर स्ट्रीट लाइट बंद रहने की समस्या पुरानी है।
विधायक के मुताबिक संबंधित क्षेत्र नगर परिषद की सीमा से बाहर होने के कारण परिषद वहां काम नहीं कर सकती। उनका कहना है कि PWD ने स्ट्रीट लाइटें लगाई थीं, लेकिन बिजली बिल के भुगतान को लेकर पंचायतों और विभाग के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र ढालियावास, पैदयावास और लालपुर गांव की सीमाओं से जुड़ा है। क्षेत्राधिकार को लेकर भ्रम के चलते लाइटों के बिजली बिल और रखरखाव की जिम्मेदारी का समाधान नहीं हो पाया है। विधायक ने समस्या का जल्द समाधान कराने की बात कही।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर रेवाड़ी SP हेमेंद्र कुमार मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूट पर स्ट्रीट लाइट चालू होने को लेकर ऐसा कोई निर्धारित नियम नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने इस मामले में किसी तरह का सुरक्षा लैप्स सामने नहीं आया है।
मामले में DC अभिषेक मीणा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।
गढ़ी बोलनी रोड की स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान हुई एक बैठक में भी सामने आया। अमनगनी में व्यापारियों ने मुख्यमंत्री के सामने इस मार्ग के आसपास बनी सोसायटियों को नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में शामिल करने की मांग रखी।
व्यापारियों ने कसौला चौक तक के क्षेत्र को नगर परिषद के अधीन लाने के साथ RRTS परियोजना जल्द शुरू कराने और पटौदी रोड का निर्माण शीघ्र पूरा कराने की मांग भी की। मुख्यमंत्री ने इन मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अब गढ़ी बोलनी रोड पर लंबे समय से बंद बताई जा रही स्ट्रीट लाइटों की जिम्मेदारी तय करने और उन्हें दोबारा चालू कराने को लेकर संबंधित विभागों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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