पंचकूला : चंडीमंदिर स्थित कमांड हॉस्पिटल (पश्चिमी कमान) में ब्रेन डेड घोषित की गई 30 वर्षीय संजू गुर्जर के परिवार ने अंगदान का फैसला लेकर छह जरूरतमंद मरीजों को जीवन और बेहतर दृष्टि की उम्मीद दी है। संजू के पति भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट में तैनात हैं, जबकि उनके पिता पैरा स्पेशल फोर्स से सेवानिवृत्त हैं। परिवार की सहमति के बाद हार्ट, लीवर, दोनों किडनी और दोनों कॉर्निया दान किए गए।
कमांड हॉस्पिटल के कमांडेंट हरकीरत सिंह के मुताबिक संजू गुर्जर राजस्थान के भीलवाड़ा की रहने वाली थीं। उनके दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र करीब तीन साल और एक साल है।
मंगलवार को अचानक गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने के बाद संजू को कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर लाया गया था। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। आवश्यक मेडिकल परीक्षण और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मंगलवार रात करीब 9 बजे उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया।
इस कठिन परिस्थिति में संजू के पति और परिवार ने उनके अंगदान करने की सहमति दी। इसके बाद कमांड हॉस्पिटल के साथ SOTTO, ROTTO-PGIMER चंडीगढ़ और NOTTO नई दिल्ली की टीमें सक्रिय हुईं। उपलब्ध मरीजों और निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुसार अंगों के आवंटन की प्रक्रिया पूरी की गई।
अंगदान प्रक्रिया में संजू का लीवर दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल के लिए आवंटित किया गया। हार्ट को नोएडा स्थित अस्पताल के लिए भेजा गया, जबकि एक किडनी PGIMS रोहतक और दूसरी किडनी कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर में जरूरतमंद मरीज के लिए रखी गई। दोनों कॉर्निया भी कमांड हॉस्पिटल में दो मरीजों के लिए दान किए गए।
इस तरह चार मरीजों को हार्ट, लीवर और किडनी के रूप में जीवनरक्षक अंग मिले, जबकि दो अन्य मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण के जरिए दृष्टि में मदद मिलने की उम्मीद है।
अंगों को निर्धारित अस्पतालों तक समय पर पहुंचाने के लिए विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। DCP पंचकूला अदिति सिंह के मुताबिक एक किडनी को PGIMS रोहतक पहुंचाने के लिए चंडीमंदिर से रोहतक की दिशा में यातायात व्यवस्था की गई। हार्ट को आगे भेजने के लिए कमांड हॉस्पिटल से चंडीगढ़ एयरपोर्ट तक भी ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया।
पंचकूला ट्रैफिक पुलिस ने SHO ट्रैफिक वरिंदर कुमार की अगुवाई में मार्ग पर यातायात नियंत्रित किया। अलग-अलग जिलों से समन्वय कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि अंग लेकर जा रही मेडिकल टीमों और एंबुलेंस को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
कमांडेंट हरकीरत सिंह ने परिवार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि बेहद कठिन समय में भी सैनिक परिवार ने दूसरे परिवारों के बारे में सोचकर अंगदान का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि संजू के बच्चे भविष्य में अपनी मां के इस योगदान पर गर्व कर सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेन डेड और कोमा अलग-अलग स्थितियां हैं। ब्रेन स्टेम डेथ की निर्धारित चिकित्सकीय और कानूनी प्रक्रिया के तहत पुष्टि होने के बाद व्यक्ति को मृत घोषित किया जाता है। ऐसे मामलों में परिवार की सहमति और निर्धारित नियमों के अनुसार अंगदान संभव हो सकता है।
संजू के परिवार का यह फैसला अंगदान के प्रति जागरूकता का भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। एक परिवार के कठिन निर्णय से कई जरूरतमंद मरीजों को जीवन और दृष्टि की नई उम्मीद मिली है।
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