101 वर्षीय नादर सिंह का दावा- आजाद हिंद फौज में लड़ा, अब तक नहीं बनी पेंशन; हिसार DC कार्यालय पहुंचकर लगाई गुहार

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Nadar Singh

हिसार : फतेहाबाद से सटे गांव हिजरावां कलां के 101 वर्षीय नादर सिंह ने स्वतंत्रता सेनानी पेंशन के लिए हिसार प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। नादर सिंह का दावा है कि उन्होंने आजाद हिंद फौज में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी लड़ाई में हिस्सा लिया था, लेकिन जरूरी दस्तावेज नष्ट हो जाने के कारण आज तक उनकी स्वतंत्रता सेनानी पेंशन नहीं बन सकी। गुरुवार को वह अपने परिवार के साथ हिसार DC कार्यालय पहुंचे और पेंशन से संबंधित मामले में कार्रवाई की मांग की।

नादर सिंह और उनके परिवार का कहना है कि वे कई वर्षों से फतेहाबाद में संबंधित विभागों के चक्कर लगा रहे हैं। अब उन्होंने हिसार प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी है। परिवार को उम्मीद है कि पुराने प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच के जरिए उनके दावे से संबंधित दस्तावेज तलाशने में मदद मिल सकती है।

नादर सिंह के बेटे स्वरूप सिंह के मुताबिक उनके पिता आजाद हिंद फौज से जुड़े थे। परिवार का दावा है कि वह विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे। इसके बाद रिश्तेदार उन्हें राजस्थान के अलवर ले गए।

स्वरूप सिंह का कहना है कि अलवर में जिस स्थान पर परिवार ठहरा हुआ था, वहां टेंट में आग लगने के कारण नादर सिंह के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जल गए थे। परिवार का दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों के नष्ट होने के कारण स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सरकारी रिकॉर्ड और पेंशन से संबंधित प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।

परिवार के अनुसार नादर सिंह लंबे समय से खुद से संबंधित पुराने रिकॉर्ड और अन्य प्रमाणों के आधार पर पेंशन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्हें प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

नादर सिंह इससे पहले भी प्रशासनिक रिकॉर्ड में हुई एक गलती के कारण चर्चा में आए थे। करीब तीन साल पहले हिजरावां कलां में स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में लगाए गए एक स्मारक पर उनके नाम के आगे ‘स्वर्गीय’ लिख दिया गया था, जबकि वह जीवित थे।

मामला सामने आने के बाद नादर सिंह स्वयं स्मारक स्थल पर पहुंचे थे। परिवार ने प्रशासनिक गलती पर नाराजगी जताई थी। बाद में स्मारक पर उनके नाम के आगे लिखा ‘स्वर्गीय’ शब्द हटवा दिया गया था।

उस समय सरपंच प्रतिनिधि करण सिंह की ओर से बताया गया था कि स्मारक पंचायत ने अपने स्तर पर नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक योजना के तहत लगवाया था। पंचायत से स्वतंत्रता सेनानी का नाम पूछा गया था, लेकिन तैयार होकर आए बोर्ड पर नादर सिंह के नाम के आगे गलती से ‘स्वर्गीय’ लिखा हुआ था। परिवार द्वारा ध्यान दिलाने के बाद इसे ठीक करा दिया गया।

अब नादर सिंह का मुख्य मुद्दा स्वतंत्रता सेनानी पेंशन का है। परिवार चाहता है कि प्रशासन उपलब्ध पुराने सरकारी रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और अन्य प्रमाणों की जांच कर उनके दावे पर नियमानुसार निर्णय ले।

फिलहाल नादर सिंह और उनके परिवार की ओर से आजाद हिंद फौज से जुड़े होने तथा पेंशन नहीं मिलने का दावा किया गया है। उनके स्वतंत्रता सेनानी होने की आधिकारिक स्थिति और पेंशन पात्रता का अंतिम निर्धारण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड तथा सक्षम प्राधिकारी की जांच के आधार पर होगा।

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