चंडीगढ़ : हरियाणा के रिटायर्ड IAS अधिकारी डी. सुरेश समेत 9 लोगों के खिलाफ गुरुग्राम में HSVP के 500 वर्ग गज से अधिक के प्लॉट से जुड़े कथित अनियमितता मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने FIR दर्ज की है। आरोप है कि करीब 3.5 करोड़ रुपए की बाजार कीमत वाली प्रॉपर्टी की कन्वेयंस डीड महज 6.71 लाख रुपए में कर दी गई। डी. सुरेश मामले के समय हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर थे।
ACB ने करीब सात साल चली जांच के बाद तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डी. सुरेश, तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार समेत कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया है। मुख्य सचिव से फरवरी 2026 में मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद 26 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की गई। डी. सुरेश 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हुए।
मामला गुरुग्राम के सेक्टर-23/23A स्थित 500.64 वर्ग गज के प्लॉट नंबर 4377 से जुड़ा है। FIR के मुताबिक HSVP ने वर्ष 1988 में यह प्लॉट एसके खोसला की फर्म को करीब 6.74 लाख रुपए में अलॉट किया था। आरोप है कि शुरुआती 10 प्रतिशत राशि जमा करने के बाद बाकी भुगतान नहीं किया गया। नोटिस के बावजूद बकाया जमा नहीं होने पर 8 अप्रैल 2002 को अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट वापस ले लिया गया।
ACB का आरोप है कि इसके बावजूद वर्ष 2003 में प्लॉट की GPA अभय सहारण के नाम की गई और बाद में प्रॉपर्टी सतवीर सिंह मलिक को ट्रांसफर कर दी गई।
जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा प्लॉट नंबर 4358 से संबंधित रिकॉर्ड है। ACB के अनुसार यह एसके खोसला से जुड़ा अलग प्लॉट था, जिसकी पूरी राशि जमा थी और रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी के कारण उसका अलॉटमेंट रद्द हुआ था। बाद में कंज्यूमर फोरम ने उसे बहाल करने का आदेश दिया था।
आरोप है कि प्लॉट नंबर 4358 और 4377 की परिस्थितियां अलग होने के बावजूद दोनों मामलों को समान मानते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों ने गलत नोट तैयार किया, जिसे तत्कालीन संपदा अधिकारी ने मंजूरी दी। इसके आधार पर 1 मार्च 2019 को तत्कालीन HSVP चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डी. सुरेश ने प्लॉट नंबर 4377 की जब्ती निरस्त कर दी।
ACB के मुताबिक वर्ष 2019 में संबंधित प्लॉट की कलेक्टर रेट के आधार पर कीमत करीब 1.75 करोड़ रुपए और अनुमानित बाजार कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपए थी। आरोप है कि इसके बावजूद कन्वेयंस डीड करीब 6.71 लाख रुपए में कर दी गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
मामला विजिलेंस जांच के दौरान सामने आया था। लंबी जांच के बाद कार्रवाई की सिफारिश की गई और मंजूरी मिलने के बाद FIR दर्ज की गई। अब मामले की जांच DSP स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि अन्य अधिकारियों या बिचौलियों की भूमिका सामने आती है तो उसकी भी जांच होगी।
इस बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से डी. सुरेश को अंतरिम राहत मिली है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक जांच के दौरान यदि उनकी हिरासत की जरूरत पड़ती है तो कम से कम सात दिन पहले नोटिस देना होगा। मामले में अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
फिलहाल FIR में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और आरोपियों का दोष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा। हाईकोर्ट की अंतरिम राहत को मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।
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