पंचकूला : मोरनी-पिंजौर वन रेंज में बेशकीमती खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। वन विभाग की जांच में जंगल के अंदर कुल 34 खैर के पेड़ कटे मिले। इस मामले में विभाग की ओर से जंगल की निगरानी के लिए लगाए गए एक वॉचमैन की कथित भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। पुलिस ने वन विभाग की शिकायत पर आठ नामजद समेत कुल 13 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
मामला 24 जून का बताया जा रहा है। वन विभाग को सूचना मिली थी कि गांव खोलमोला के पास आर-71 सी-9 जंगल से गुजरने वाले कौना लिंक रोड पर एक संदिग्ध कार खड़ी है। सूचना के बाद नानकपुर ब्लॉक इंचार्ज वन दरोगा सुमित सिंह और बीट-9 इंचार्ज वन रक्षक सचिन टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
वन विभाग के मुताबिक टीम के पहुंचने की भनक लगते ही संदिग्ध कार वहां से निकल गई। टीम ने उसका पीछा करने का प्रयास किया, लेकिन रात और अंधेरे का फायदा उठाकर कार सवार फरार हो गए।
इसके बाद वन विभाग की टीम ने आसपास के जंगल में तलाशी अभियान चलाया। सड़क से करीब एक से डेढ़ किलोमीटर अंदर 26 खैर के पेड़ कटे मिले। जंगल के दूसरी तरफ आठ अन्य खैर के पेड़ भी कटे पाए गए। इस तरह कुल 34 पेड़ों की अवैध कटाई सामने आई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ पेड़ों को काटने के बाद उनके लट्ठे तैयार कर दिए गए थे। वन विभाग ने मौके से कटी हुई लकड़ी को कब्जे में लेकर मामले में फॉरेस्ट ऑफेन्स रिपोर्ट दर्ज की और जांच शुरू की।
विभाग का कहना है कि संदिग्ध कार और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर कई लोगों के नाम जांच में सामने आए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक व्यक्ति ने दिहाड़ी पर अन्य लोगों को जंगल में अवैध कटाई के लिए लगाया था। इन दावों की अब पुलिस जांच कर रही है।
मामले में वन विभाग की ओर से जंगल की निगरानी के लिए लगाए गए वॉचमैन बाबू राम की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। शिकायत के अनुसार इतनी अंदर तक जाकर पेड़ों की कटाई और लकड़ी तैयार करने में स्थानीय स्तर पर सहयोग मिलने की आशंका है। हालांकि वॉचमैन की संलिप्तता अभी जांच का विषय है और आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं।
वन विभाग ने पुलिस से संदिग्धों की कॉल डिटेल और आपसी संपर्क की जांच करने का भी अनुरोध किया है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि अवैध कटाई में कितने लोग शामिल थे और क्या इसका संबंध किसी बड़े नेटवर्क से है।
शिकायत में कुछ संदिग्धों के खिलाफ पहले भी अवैध कटाई से जुड़े मामले होने की बात कही गई है। इसके अलावा पिंजौर के साथ HMT, आसरेवाली, छछरौली और कलेसर क्षेत्र के जंगलों में हुई पूर्व की घटनाओं से संभावित संबंध की भी जांच की मांग की गई है।
DFO विशाल कौशिक के मुताबिक पेड़ों की कटाई की जानकारी मिलने के बाद विभाग की ओर से शिकायत भेज दी गई थी और अब FIR की प्रति मिली है। उन्होंने कहा कि जिस विभागीय कर्मचारी का नाम मामले में सामने आया है, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उनके मुताबिक खैर के एक पेड़ की अनुमानित कीमत करीब 6 से 8 हजार रुपए तक हो सकती है।
पंचकूला के वन क्षेत्रों में इससे पहले भी खैर के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले सामने आ चुके हैं। आसरेवाली संरक्षित वन क्षेत्र से जुड़े एक पुराने मामले में SIT जांच के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों और अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद गिरफ्तारियां और विभागीय कार्रवाई हुई थी।
फिलहाल नए मामले में दर्ज FIR के आधार पर पुलिस और वन विभाग जांच आगे बढ़ा रहे हैं। आरोपियों की भूमिका, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अवैध कटाई के पीछे पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और इसमें किसी विभागीय कर्मचारी की मिलीभगत थी या नहीं।
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