करनाल में 5 गांवों के पशुपालक एकजुट, दूध का रेट ₹12 प्रति फैट करने की मांग; गाय-भैंस की बीमा सीमा बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया

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Karnal Dairy Farmers

करनाल : जिले के नरूखेड़ी पंचायत घर में शुक्रवार को पांच गांवों के पशुपालकों की बैठक हुई। बैठक में दूध का भाव 12 रुपए प्रति फैट निर्धारित करने, गाय और भैंस की बीमा राशि बढ़ाने तथा गांव के पशु अस्पताल में डॉक्टर की नियुक्ति करने समेत कई मांगें उठाई गईं। पशुपालकों ने बढ़ती लागत का हवाला देते हुए सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

बैठक में जैणी, नरूखेड़ी, बड़ौता, जुंडला और बीड़ माजरा समेत आसपास के पशुपालक शामिल हुए। पशुपालक अनिल नरवाल, जोगिंद्र, सुखविंद्र सिंह, परगट सिंह, गुरमीत सिंह और मनदीप सिंह समेत अन्य लोगों ने कहा कि पशुपालन पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है।

पशुपालकों के मुताबिक तूड़ी, खल, बिनौला और हरे-सूखे चारे की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि दूध के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं। इससे गाय और भैंस पालकर दूध उत्पादन करने वाले लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

बैठक में पशुपालकों ने आरोप लगाया कि दूध खरीदने वाले ठेकेदार अपने स्तर पर रेट तय करते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि गाय और भैंस दोनों के दूध के लिए 12 रुपए प्रति फैट की दर निर्धारित की जाए। उनका कहना है कि एक समान और बेहतर दर मिलने से पशुपालन में होने वाले खर्च को पूरा करने में मदद मिलेगी।

बैठक में पशुओं के बीमा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। पशुपालकों का कहना है कि अच्छी नस्ल की गाय और भैंस की बाजार कीमत अब काफी बढ़ चुकी है, जबकि मौजूदा बीमा राशि वास्तविक कीमत के मुकाबले कम है।

पशुपालकों के अनुसार वर्तमान में गाय के लिए 60 हजार रुपए और भैंस के लिए 90 हजार रुपए तक की बीमा सीमा है। उन्होंने गाय की बीमा राशि बढ़ाकर एक लाख रुपए और भैंस की बीमा राशि बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए करने की मांग की। पांचों गांवों से पहुंचे पशुपालकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

इसके अलावा नरूखेड़ी क्षेत्र के पशु अस्पताल में डॉक्टर की उपलब्धता का मुद्दा भी बैठक में उठा। पशुपालकों ने मांग की कि अस्पताल में नियमित पशु चिकित्सक नियुक्त किया जाए, ताकि बीमार पशुओं के इलाज के लिए उन्हें दूर न जाना पड़े और समय पर उपचार मिल सके।

बैठक में महाराष्ट्र की तर्ज पर पशु चिकित्सा से जुड़ी व्यवस्था लागू करने का सुझाव भी दिया गया। पशुपालकों ने पशु चिकित्सक की फीस 100 रुपए निर्धारित करने और इलाज से जुड़े शेष खर्च का भार सरकार द्वारा वहन किए जाने की मांग रखी।

पशुपालकों का कहना है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बड़ी संख्या में परिवारों की आय का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में चारे और अन्य लागत बढ़ने के साथ दूध का उचित मूल्य और पशुओं के इलाज व बीमा की बेहतर व्यवस्था जरूरी है।

बैठक में शामिल पशुपालकों ने सरकार से उनकी मांगों पर विचार कर समाधान निकालने की अपील की। साथ ही कहा कि मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले दिनों में वे सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय कर सकते हैं।

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