सिंगापुर में भारतीयों से साइबर ठगी का मुख्य आरोपी 13 साल बाद गिरफ्तार, अमेरिका से डिपोर्ट होते ही CBI ने दिल्ली एयरपोर्ट पर दबोचा

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CBI Cyber Fraud Case

पंचकूला : सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों से साइबर ठगी के मामले में एक दशक से अधिक समय से फरार चल रहे आरोपी हरनेक सिंह को CBI ने गिरफ्तार किया है। इंटरपोल रेड नोटिस और लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी होने के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने उसे भारत डिपोर्ट किया। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही CBI की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया।

CBI के मुताबिक हरनेक सिंह 2013 से फरार चल रहा था। उसे 9 सितंबर को अमेरिका से भारत भेजा गया। दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद CBI ने उसे गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की। इसके बाद उसे पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मामला वर्ष 2013 में सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों से हुई कथित साइबर ठगी से जुड़ा है। CBI के अनुसार भारत से सक्रिय आरोपियों ने पीड़ितों को फोन कर खुद को सिंगापुर के इमिग्रेशन विभाग का अधिकारी बताया था।

आरोप है कि स्पूफ कॉल के जरिए पीड़ितों से कहा जाता था कि उन्होंने एयरपोर्ट पर डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी दी है। इसके कारण उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सिंगापुर से डिपोर्ट किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कहकर उन्हें डराया जाता था।

CBI के मुताबिक इसके बाद कथित जुर्माने और सेटलमेंट फीस के नाम पर पीड़ितों से रकम मांगी जाती थी। भुगतान के लिए वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। पीड़ितों से रकम भारत भेजने के लिए कहा जाता था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि ठगी से हासिल रकम हरनेक सिंह द्वारा संचालित मनी ट्रांसफर आउटलेट के जरिए निकाली जाती थी। इस मामले में हरनेक के अलावा आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन को भी आरोपी बनाया गया था।

CBI के अनुसार हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से फरार हो गया था और बाद में अमेरिका पहुंच गया। जांच एजेंसी ने वर्ष 2016 में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

मामले के दो सह-आरोपियों आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ पंचकूला की विशेष अदालत में ट्रायल पूरा हो चुका है। अदालत ने 26 मई 2025 को दोनों को दोषी करार दिया था। वहीं हरनेक के फरार रहने के कारण उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी रही।

CBI के मुताबिक अमेरिका में रहने के दौरान हरनेक सिंह को भारतीय अदालत की ओर से समन और जमानती वारंट भी तामील कराए गए, लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

इसके बाद आरोपी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाशने की प्रक्रिया तेज की गई। इंटरपोल के माध्यम से रेड नोटिस जारी कराया गया और उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर भी जारी किया गया। अमेरिकी एजेंसियों की कार्रवाई के बाद उसे भारत डिपोर्ट किया गया।

करीब 13 साल बाद गिरफ्तारी के बाद अब हरनेक सिंह के खिलाफ अदालत में आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। उसके खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम फैसला न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

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