कुरुक्षेत्र : शहर में दशहरा उत्सव के आयोजन को लेकर कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा और भाजपा के पूर्व मंत्री सुभाष सुधा के समर्थकों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। इसके बाद शहर में इस बार दो अलग-अलग स्थानों पर दशहरा मेला और रावण दहन होने की स्थिति बन गई है। शुक्रवार को पंजाबी धर्मशाला में हुई बैठक में अलग दशहरा उत्सव आयोजित करने और इसके लिए सर्वजातीय दशहरा कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया।
बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाजों के प्रतिनिधि शामिल हुए। नई कमेटी के संरक्षक विधायक अशोक अरोड़ा होंगे। आयोजकों के मुताबिक यह कमेटी किसी एक जाति या वर्ग की नहीं होगी, बल्कि शहर के अलग-अलग समाजों के लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा।
नई कमेटी की ओर से ब्रह्मसरोवर के पास मेला ग्राउंड में दशहरा उत्सव आयोजित करने की तैयारी है। वहीं पहले से आयोजन करती आ रही कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी थीम पार्क में कार्यक्रम करेगी। नई कमेटी का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को जिला प्रशासन से मिलकर आयोजन स्थल और आवश्यक अनुमति के लिए आवेदन करने की तैयारी में है।
इससे पहले दोनों पक्षों को साथ लाकर एक ही दशहरा उत्सव आयोजित करने के प्रयास भी किए गए। कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी ने विवाद का समाधान निकालने के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था तक का विकल्प रखा। इसके अलावा एक ही आयोजन स्थल पर दो स्टेज बनाने का सुझाव भी सामने आया, लेकिन कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी।
विधायक अशोक अरोड़ा के मुताबिक कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी के कार्यक्रम में स्थानीय विधायक को मुख्य अतिथि बनाने की परंपरा रही है। उनका आरोप है कि पिछले दो वर्षों से इस व्यवस्था को बदलने की कोशिश की जा रही थी। इसी कारण विवाद बढ़ा और आखिरकार अलग आयोजन का फैसला लेना पड़ा।
अरोड़ा ने कहा कि दशहरा सभी लोगों का पर्व है और नए आयोजन में हर समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा निकालने की भी बात कही है।
दूसरी ओर पूर्व मंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि वह शहर में दो अलग-अलग दशहरा उत्सव कराने के बजाय एक ही आयोजन के पक्ष में हैं। उनके मुताबिक दशहरा कमेटी से सभी पक्षों को सम्मान देने की बात कही गई थी। समर्थकों के आमने-सामने बैठने से किसी तरह के विवाद की आशंका को देखते हुए उनके लिए अलग बैठने की व्यवस्था की जा सकती थी।
सुधा के अनुसार एक आयोजन में अलग-अलग बैठने की व्यवस्था या दो मंच बनाने जैसे विकल्पों पर विचार किया गया था। अंतिम व्यवस्था किस तरह की जाए, इसका निर्णय आयोजन कमेटी को करना था। हालांकि चार दिनों तक चली बातचीत के बावजूद कोई सर्वसम्मत समाधान नहीं निकल सका।
कुरुक्षेत्र में दशहरा और रावण दहन की परंपरा कई दशक पुरानी है। बताया जाता है कि देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से यहां आए लोगों ने शहर में रावण दहन की परंपरा को आगे बढ़ाया था। बाद में दो अलग-अलग दशहरा कमेटियां आयोजन करने लगीं।
वर्ष 2000 में अशोक अरोड़ा की पहल के बाद दोनों कमेटियों को एक मंच पर लाकर एक ही दशहरा उत्सव आयोजित करने की व्यवस्था बनी थी। हालांकि वर्ष 2005 में तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के बीच एक बार फिर अलग आयोजन हुआ था, लेकिन उसके बाद दोबारा एक कमेटी के तहत थीम पार्क में दशहरा मनाया जाने लगा।
अब अलग आयोजन की तैयारी के बाद प्रशासन के सामने भी दोनों कार्यक्रमों के लिए स्थान, सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की चुनौती रहेगी। नई कमेटी की प्रशासन से होने वाली मुलाकात और आयोजन स्थल को मिलने वाली अनुमति के बाद दोनों दशहरा उत्सवों की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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