मोहन लाल बड़ौली-रॉकी मित्तल केस में हाईकोर्ट से राहत बरकरार, पीड़िता की रिविजन याचिका खारिज; कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार करने का फैसला कायम

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Mohan Lal Badoli

शिमला : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हरियाणा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और गायक रॉकी मित्तल से जुड़े कथित गैंगरेप मामले में कसौली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। जस्टिस राकेश कैंथला की बेंच ने शिकायतकर्ता महिला की रिविजन पिटिशन खारिज कर दी। महिला ने निचली अदालत द्वारा पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि केवल शिकायतकर्ता के हलफनामे या बयान के आधार पर आरोपियों को समन जारी करना पर्याप्त नहीं है, खासकर तब जब मामले में बताई गई प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी गवाह ही आरोपों का समर्थन नहीं कर रही हो।

इस मामले की शुरुआत 13 दिसंबर 2024 को हुई थी, जब एक महिला ने सोलन जिले के कसौली पुलिस थाने में मोहन लाल बड़ौली और रॉकी मित्तल के खिलाफ गैंगरेप का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। शिकायत में महिला ने कथित घटना की तारीख 23 जुलाई 2024 बताई थी।

महिला ने आरोप लगाया था कि वह अपनी एक सहेली और अपने बॉस अमित बिंदल के साथ कसौली घूमने गई थी। इसी दौरान एक होटल में उसके साथ कथित तौर पर यौन हिंसा की गई और बाद में धमकियां दी गईं। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।

मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता की ओर से गवाह बताई गई उसकी सहेली ने आरोपों का समर्थन करने से इनकार कर दिया। महिला की सहेली ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि उसने कथित घटना नहीं देखी और मोहन लाल बड़ौली को होटल में नहीं देखा था। उसने पूरे मामले की सत्यता पर भी सवाल उठाए थे।

पुलिस ने दो महीने से अधिक समय तक मामले की जांच की। जांच के दौरान कथित घटना के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई। FIR कथित घटना के कई महीने बाद दर्ज होने के कारण घटनास्थल से संबंधित कई संभावित भौतिक और डिजिटल साक्ष्य जुटाने में भी कठिनाई होने की बात कही गई।

पुलिस जांच के मुताबिक होटल के कर्मचारियों से पूछताछ में भी आरोपों की पुष्टि करने वाली पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी। शिकायतकर्ता द्वारा मेडिकल जांच नहीं कराए जाने की बात भी पुलिस रिकॉर्ड में सामने आई। इसके बाद पुलिस ने मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की।

मामला इसके बाद अलग-अलग न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजरा। शिकायतकर्ता ने पुलिस की रिपोर्ट का विरोध किया और निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। एक चरण में सोलन कोर्ट ने मामले पर दोबारा सुनवाई के निर्देश भी दिए थे।

आखिरकार 8 जनवरी 2026 को कसौली की संबंधित अदालत ने पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार कर ली। अदालत के इसी फैसले को शिकायतकर्ता ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में रिविजन पिटिशन के जरिए चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने अब उसकी याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इससे मोहन लाल बड़ौली और रॉकी मित्तल के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार करने का निचली अदालत का आदेश फिलहाल कायम है।

हाईकोर्ट का फैसला आरोप लगाने वाली महिला के दावों की अलग से सत्यता तय करने के बजाय उपलब्ध रिकॉर्ड, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर निचली अदालत के आदेश की समीक्षा से संबंधित है। अदालत के फैसले के बाद इस मामले में कसौली कोर्ट द्वारा कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार किए जाने की स्थिति बरकरार है।

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