युवराज मनचंदा हत्याकांड में सीन री-क्रिएट, ₹1 करोड़ के लेन-देन को लेकर हत्या की साजिश का दावा; 3 महीने पहले हथियार खरीदने की बात आई सामने

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Yuvraj Singh Manchanda Murder

गुरुग्राम : रियल एस्टेट कंपनी के मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड की जांच में पुलिस ने घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने के लिए गुरुग्राम में सीन री-क्रिएशन कराया। पुलिस जांच में दावा किया गया है कि युवराज को अपनी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स से करीब एक करोड़ रुपए लेने थे और इसी वित्तीय विवाद को लेकर हत्या की साजिश रची गई। पुलिस के मुताबिक आन्या ने अपने लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा के साथ मिलकर वारदात की योजना बनाई थी।

दिल्ली पुलिस आरोपियों को लेकर गुरुग्राम पहुंची और द्वारका एक्सप्रेसवे, सेक्टर-65 तथा सेक्टर-70 समेत उन स्थानों पर गई, जिन्हें जांच में वारदात से जोड़ा गया है। पुलिस ने पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई।

जांच के दौरान आरोपियों से यह जानकारी जुटाई गई कि युवराज को किस स्थान पर बुलाया गया, वारदात कैसे हुई, हथियार को कहां छिपाया गया और शव को किस स्थान पर ठिकाने लगाया गया। पुलिस इन जानकारियों का फॉरेंसिक, डिजिटल और अन्य साक्ष्यों से मिलान कर रही है।

पुलिस जांच में यह भी दावा सामने आया है कि आन्या ने वारदात से करीब तीन महीने पहले एक देसी हथियार खरीदा था। हथियार कहां से खरीदा गया और इसे उपलब्ध कराने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

मामले में गुरुग्राम पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी सुहेल खान को निलंबित किया जा चुका है। आरोप है कि अज्ञात शव मिलने की जानकारी समय पर अंतर-राज्यीय पुलिस पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई।

युवराज का शव गुरुग्राम पुलिस को 10 सितंबर को बादशाहपुर क्षेत्र में मिला था। दूसरी ओर दिल्ली में परिवार की ओर से उसकी गुमशुदगी दर्ज होने के बाद संबंधित जानकारी 11 सितंबर को पुलिस पोर्टल पर उपलब्ध थी। आरोप है कि गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात शव से संबंधित डेटा 16 सितंबर को पोर्टल पर अपडेट किया।

इसके अलावा रिकॉर्ड की कैटेगरी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा है कि जानकारी ‘अज्ञात शव’ के बजाय दूसरी कैटेगरी में दर्ज होने के कारण दोनों राज्यों के रिकॉर्ड का समय रहते मिलान नहीं हो सका।

पहचान नहीं होने के कारण निर्धारित प्रक्रिया के बाद 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया था। बाद में उसकी पहचान दिल्ली निवासी युवराज सिंह मनचंदा के रूप में हुई। परिवार समय रहते उसकी पहचान नहीं होने और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाने को लेकर सवाल उठा चुका है।

युवराज 6 सितंबर को अपनी बहन के साथ दिल्ली के लाजपत नगर में शादी की खरीदारी करने गया था। परिवार के अनुसार उसकी शादी होने वाली थी। शाम करीब चार बजे उसने गुरुग्राम में एक मीटिंग होने की बात कही और रात तक वापस आने को कहा, लेकिन इसके बाद वह घर नहीं लौटा।

जांच में युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स के साथ उसकी बातचीत की जानकारी सामने आई। आन्या का फोन बंद मिलने के बाद तकनीकी जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस के मुताबिक नए सिम और अन्य तकनीकी इनपुट के आधार पर आन्या की लोकेशन उत्तराखंड में मिली, जहां से उसे संयम सचदेवा के साथ पकड़ा गया।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ में दोनों की वारदात में कथित भूमिका सामने आई है। हालांकि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित बयानों की पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों से की जा रही है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में होगा।

इधर युवराज की बहन ने साकेत कोर्ट में आवेदन देकर बादशाहपुर थाने के पास मौजूद रिकॉर्ड, सामान और इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने की मांग की है। अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और उसे पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मामले की आगे की जांच में उसका इस्तेमाल किया जा सके।

फिलहाल दिल्ली पुलिस वित्तीय लेन-देन, कथित साजिश, हथियार की खरीद, आरोपियों की गतिविधियों और शव को ठिकाने लगाने से जुड़े प्रत्येक पहलू की जांच कर रही है। सीन री-क्रिएशन से मिली जानकारी का भी उपलब्ध तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है।

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