मंडी मजदूरों ने मजदूरी दर बढ़ाने की मांग की, प्रति बोरी 37 पैसे की बढ़ोतरी को बताया अपर्याप्त

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Mandi Workers

अनाज मंडी में काम करने वाले मजदूरों ने बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरी की दरें संशोधित करने की मांग उठाई है। मजदूरों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च बढ़ रहा है, लेकिन उनकी मजदूरी में मामूली बढ़ोतरी हुई है। बिहार समेत दूसरे राज्यों से रोजगार के लिए आए मजदूरों ने मौजूदा दरों पर परिवार का खर्च चलाने में मुश्किल बताई है।

मजदूरों के अनुसार, इस साल प्रति बोरी मजदूरी 11 रुपये 68 पैसे तय की गई है। पिछले साल यह दर 11 रुपये 31 पैसे थी। इस तरह एक साल में प्रति बोरी केवल 37 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि काम की मेहनत और बढ़ते खर्च के मुकाबले यह वृद्धि पर्याप्त नहीं है।

मंडी में मजदूरों को फसल से भरी ट्रॉलियां खाली करने, धान को बोरियों में भरने, बोरियों को कांटे पर तुलवाने और निर्धारित स्थान पर रखने का काम करना पड़ता है। मजदूरों के मुताबिक, इन सभी कामों के लिए प्रति बोरी तय रकम मिलती है। उन्होंने श्रम और काम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दरें बढ़ाने की मांग की है।

बिहार से आए मजदूरों ने बताया कि फसल सीजन में भी रोजाना बराबर काम नहीं मिलता। कुछ दिनों में ट्रॉलियों की आवक कम रहती है, जबकि कई बार पूरा दिन काम का इंतजार करना पड़ता है। इससे उनकी मासिक आय प्रभावित होती है।

मजदूरों का दावा है कि महीने भर की औसत कमाई करीब आठ से दस हजार रुपये रह जाती है। इसी रकम से उन्हें अपने रहने और खाने का खर्च निकालना होता है। इसके बाद परिवार को भेजने के लिए सीमित पैसा बचता है।

स्थानीय किसानों ने भी मजदूरी दर बढ़ाने की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि मजदूर फसल की उतराई, भराई, तुलाई और भंडारण व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उचित मजदूरी मिलने से मंडी का काम सुचारु रखने में मदद मिलेगी।

मामले में मार्केट कमेटी और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर नियमानुसार उचित कदम उठाने की बात कही गई है। हालांकि, मजदूरी की दरों में नई बढ़ोतरी का कोई निर्णय सामने नहीं आया है।

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