सोनीपत के गुमड़ गांव की एथलीट किरण पहल के एशियन गेम्स में 4×400 मीटर रिले का स्वर्ण पदक जीतने पर गांव में स्वागत की तैयारी है। रविवार को उनके पहुंचने पर गन्नौर के जीटी रोड स्थित बस स्टैंड से गांव के ग्राम सचिवालय तक स्वागत यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद सम्मान समारोह आयोजित होगा।
किरण की उपलब्धि के पीछे वर्षों का अभ्यास और आर्थिक चुनौतियों से जूझने का सफर है। तीसरी कक्षा में लड़कियों को जिम्नास्टिक करते देखकर उनकी खेलों में रुचि बनी। पांचवीं कक्षा में उन्होंने स्कूल की प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। दौड़ सहित विभिन्न स्पर्धाओं में जीतने पर उन्हें पहली बार 500 रुपए का पुरस्कार मिला।
वर्ष 2009 में उन्होंने स्कूल के मैदान में दौड़ का अभ्यास शुरू किया। उनके खेल सफर के विवरण के अनुसार, एक व्यक्ति की टिप्पणी के बाद परिवार ने करीब पांच महीने अभ्यास रोक दिया था। बाद में किरण ने परिवार को भरोसा दिलाया और दोबारा मैदान में उतरने की अनुमति मिली।
वर्ष 2010 में वह गांव से करीब दो किलोमीटर दूर अभ्यास करने पैदल जाती थीं। सिंथेटिक ट्रैक नहीं होने पर घास के मैदान में तैयारी करती रहीं। वर्ष 2012 में परिवार ने 300 रुपए की पुरानी साइकिल खरीदी, जिससे मैदान तक पहुंचना आसान हुआ।
बेहतर प्रशिक्षण के लिए किरण 2015 में रोहतक गईं। रहने और खाने का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने पतंजलि स्टोर में चार हजार रुपए महीने की नौकरी की। सुबह अभ्यास, दिन में नौकरी और शाम को दोबारा प्रशिक्षण उनका नियमित क्रम रहा।
वर्ष 2018 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद रेलवे में नौकरी का अवसर मिला। दसवीं पास नहीं होने से बाधा आई तो उन्होंने दोबारा पढ़ाई करके 2019 में परीक्षा पास की। उसी वर्ष पटियाला के इंडिया कैंप में बुलावा आया।
कोविड के दौरान खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं, लेकिन किरण ने तैयारी जारी रखी। जून 2021 में रेलवे में जूनियर क्लर्क बनीं और नौकरी के साथ अभ्यास करती रहीं। पेरिस ओलंपिक 2024 में भी उन्होंने हिस्सा लिया। अब रिले के स्वर्ण पदक के साथ लौट रही किरण के स्वागत को लेकर परिवार और ग्रामीण उत्साहित हैं।
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