चंडीगढ़ पुलिस की महिला कॉन्स्टेबल सपना यादव की हत्या के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी पति परविंदर को नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस एचएस ग्रेवाल की बेंच ने मामले के परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित होने और आरोपी की लंबी हिरासत को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया।
सपना का शव 11 मार्च 2025 को पंचकूला में मानसा देवी मंदिर के पास खड़ी उनकी टोयोटा ग्लैंजा कार की पिछली सीट पर मिला था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह चंडीगढ़ पुलिस की सीआईडी विंग में कॉन्स्टेबल थीं और पति के साथ मोहाली के नया गांव में रहती थीं।
उस दिन सपना ड्यूटी पर नहीं पहुंचीं और उनका फोन बंद था। उनकी सहेली उर्मिला कुमारी ने साकेतड़ी रोड पर कार लावारिस हालत में खड़ी देखी। कार लॉक थी और अंदर सपना का शव मिला।
सपना के भाई गौरव की शिकायत पर 12 मार्च 2025 को मानसा देवी कॉम्प्लेक्स थाने में हत्या का केस दर्ज किया गया। शिकायत में परविंदर पर लंबे समय से प्रताड़ित करने और हत्या के बाद शव कार में रखने के आरोप लगाए गए थे। मामले में बीएनएस की धारा 103(1) और बाद में सबूत मिटाने से संबंधित धारा 238 जोड़ी गई। पुलिस ने 15 मार्च को आरोपी को अंबाला से गिरफ्तार किया था।
आठ अक्टूबर की सुनवाई में बचाव पक्ष के वकीलों डीएस हुड्डा और पवन हुड्डा ने आरोपी को झूठा फंसाने का तर्क दिया। उन्होंने लंबी हिरासत और मौत के कारण संबंधी मेडिकल रिपोर्टों में कथित विरोधाभास का मुद्दा भी उठाया।
हरियाणा सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल विजय कुमार ने आरोपों की गंभीरता का हवाला देकर जमानत का विरोध किया।
दोनों पक्षों को सुनकर कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी के बीच लंबे समय तक हिरासत बिना सुनवाई के सजा जैसी हो सकती है। अदालत ने संतोषजनक बॉन्ड भरने पर रिहाई का आदेश दिया। जमानत का आदेश आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है; मामले का ट्रायल जारी है।
![]()











