झज्जर में टाटा पंच कार से 11.58 ग्राम स्मैक बरामद होने के मामले में आरोपी साहिल की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह ने बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने तथा अभिलेखों पर विचार करने के बाद राहत देने से इनकार किया।
पुलिस के अनुसार, 11 सितंबर 2026 को उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार को सूचना मिली थी कि कुछ लोग टाटा पंच कार में नशीला पदार्थ लेकर बादली से झज्जर की ओर आ रहे हैं। टीम ने बादली रोड फ्लाईओवर के पास नाकेबंदी कर कार को रोका। उसमें मनोज, रोबिन, नीरज, साहिल और सौरभ सवार थे।
पुलिस का कहना है कि ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं तहसीलदार अंशुल की मौजूदगी में कार की तलाशी ली गई। डैशबोर्ड में रखी सफेद पन्नी से 11.58 ग्राम स्मैक बरामद हुई। इसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। शहर झज्जर थाने में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत प्राथमिकी दर्ज है।
सुनवाई में बचाव पक्ष के अधिवक्ता संदीप कादियान ने साहिल को झूठा फंसाने की दलील दी। उन्होंने कहा कि आरोपी 11 सितंबर से हिरासत में है और नशीला पदार्थ उसकी व्यक्तिगत तलाशी से नहीं, बल्कि कार के डैशबोर्ड से मिला था। इसी आधार पर नियमित जमानत की मांग की गई।
लोक अभियोजक धीरेंद्र हुड्डा ने इसका विरोध किया। अभियोजन ने कहा कि साहिल उसी कार में सवार था, जिसके डैशबोर्ड से स्मैक मिली। मामले की गंभीरता और उपलब्ध सामग्री का हवाला देते हुए जमानत नहीं देने का आग्रह किया गया।
अदालत ने नशे के सामाजिक प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसका नुकसान व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और युवा पीढ़ी का भविष्य भी प्रभावित होता है। कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ समाज के हितों पर विचार करने की आवश्यकता बताई।
यह फैसला नियमित जमानत याचिका पर है। साहिल के खिलाफ आरोपों पर अंतिम निर्णय मुकदमे की सुनवाई और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद होगा।
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