चरखी दादरी में अपहरण और धमकी के मामले में चार दोषियों को पांच-पांच साल की सजा, छीना-झपटी के आरोप से बरी

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Charkhi Dadri News

चरखी दादरी में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार की अदालत ने वर्ष 2018 के अपहरण और धमकी के मामले में चार दोषियों को पांच-पांच साल की सश्रम कैद सुनाई है। इनमें एक दोषी घटना के समय नाबालिग था। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों और गवाहियों के अभाव में छीना-झपटी के आरोप से उन्हें बरी कर दिया।

चारों को भारतीय दंड संहिता की धारा 365 और 506 के तहत धारा 34 के साथ दोषी ठहराया गया। अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए 13 गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद फैसला दिया।

मामला सिटी दादरी थाने में 7 जून 2018 को दर्ज एफआईआर संख्या 212 से संबंधित है। शिकायतकर्ता लकी के अनुसार, 4 जून की शाम करीब सात बजे कुछ लोग उसके घर के बाहर पहुंचे थे। उन्होंने उसकी मां की ओर से महिला थाने में दी गई शिकायत में समझौता करने का दबाव बनाया।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि समझौते से इनकार करने पर उसे जबरन एक आरोपी के घर ले जाया गया और मारपीट की गई। इसके बाद उसे वर्धमान स्कूल के पीछे ले जाकर दोबारा हमला किया गया। घायल अवस्था में उसे उपचार के लिए भिवानी के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

लकी ने अपनी जेब से सात हजार रुपये छीनने का आरोप भी लगाया था। हालांकि, अदालत में इस आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले और दोषियों को इस आरोप से बरी कर दिया गया।

घटना के समय नाबालिग रहे दोषी के मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, भिवानी ने प्रारंभिक मूल्यांकन किया था। बोर्ड ने 9 अक्टूबर 2018 को मामला वयस्क की तरह सुनवाई के लिए चिल्ड्रन कोर्ट में स्थानांतरित किया था। उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

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