पंचकूला। जिले के रामगढ़ स्थित आईटीबीपी फैमिली कॉम्प्लेक्स में तैनात 58 वर्षीय सब-इंस्पेक्टर (टेलीकम्युनिकेशन) मदन सिंह से साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 7.50 लाख रुपए की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को शिमला पुलिस, एटीएस पुणे और एनआईए का अधिकारी बताकर पीड़ित को 14 दिनों तक डराकर रखा। ठगों ने सुप्रीम कोर्ट और भारतीय रिजर्व बैंक के नाम से फर्जी दस्तावेज भी भेजे। पीड़ित की शिकायत पर पंचकूला साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, मदन सिंह के मोबाइल पर एक कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को शिमला पुलिस का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर जारी सिम कार्ड किसी आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है। मदन सिंह ने आईटीबीपी में कार्यरत होने की जानकारी दी तो आरोपियों ने मामला एटीएस पुणे भेजने का नाटक किया। इसके बाद पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल कर जम्मू-कश्मीर में उग्रवादी से संबंध और आर्थिक लेनदेन के आरोप लगाए। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें हर दो घंटे में ऑनलाइन रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए गए। ठग इंटरनेट बंद होने पर भी लगातार फोन करके संपर्क बनाए रखते थे। सात अक्टूबर को आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजा। इसके बाद आरबीआई के फर्जी पत्र दिखाकर निवेश की रकम बैंक खाते में जमा करवाने का दबाव बनाया। आरोपियों ने 11 अक्टूबर को यस बैंक खाते में दो-दो लाख रुपए के दो चेक के माध्यम से चार लाख रुपए ट्रांसफर करवाए। अगले दिन बैंक ऑफ इंडिया खाते में तीन लाख रुपए और यूपीआई के जरिए 50 हजार रुपए भेजने को कहा। ठगों ने 12 घंटे में सत्यापन पूरा कर रकम लौटाने और एनओसी जारी करने का भरोसा दिया था। जब पैसे वापस नहीं मिले और पीड़ित के एसबीआई खाते में केवल 45 हजार रुपए बचे, तब उन्हें धोखाधड़ी का अहसास हुआ। साइबर थाना सेक्टर-20 के प्रभारी युद्धवीर ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करवाने और आरोपियों की पहचान करने की कार्रवाई कर रही है।
![]()











