नीति आयोग का चेयरमैन बनवाने के नाम पर 99.50 लाख की कथित ठगी, आरोपी कपिल रैना को कोर्ट से राहत नहीं; पुनरीक्षण याचिका खारिज

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Bahadurgarh News

झज्जर। बहादुरगढ़ में नीति आयोग का चेयरमैन बनवाने के नाम पर 99.50 लाख रुपए की कथित ठगी से जुड़े मामले में आरोपी कपिल रैना को अदालत से राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमित गर्ग की अदालत ने उसकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा डिस्चार्ज अर्जी नामंजूर करने का आदेश बरकरार रखा है। मामला बहादुरगढ़ के गांव सराय औरंगाबाद निवासी राकेश सिंह की शिकायत से संबंधित है। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने ऊंची राजनीतिक पहुंच का दावा करते हुए उन्हें नीति आयोग का चेयरमैन बनवाने का भरोसा दिया था। इसके बदले दो करोड़ रुपए की मांग की गई और एक करोड़ रुपए अग्रिम देने को कहा गया। आरोप है कि पार्टी फंड के नाम पर 30 लाख रुपए नकद तथा 69.50 लाख रुपए बैंक खातों के माध्यम से लिए गए। इस प्रकार कुल 99.50 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, मुख्य आरोपी प्रवीण चंदर के कहने पर राकेश सिंह के खाते से पांच लाख रुपए कपिल रैना के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। मामले में 27 अगस्त 2021 को बहादुरगढ़ के सेक्टर-6 थाने में एफआईआर नंबर 287 दर्ज की गई थी। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 406, 420 और 506 के तहत जांच कर अदालत में चालान पेश किया। कपिल रैना ने अपनी डिस्चार्ज अर्जी में दावा किया कि उसका कथित धोखाधड़ी से कोई संबंध नहीं है। उसके अनुसार, उसने वर्ष 2020 में प्रवीण चंदर को पांच लाख रुपए उधार दिए थे और खाते में आई रकम उसी कर्ज की वापसी थी। बचाव पक्ष ने वॉट्सऐप चैट का भी हवाला दिया। हालांकि, अदालत ने कहा कि इस चरण पर बचाव पक्ष के दस्तावेजों की विस्तृत जांच नहीं की जा सकती। उनकी प्रामाणिकता और लेन-देन की परिस्थितियों का परीक्षण मुकदमे के दौरान होगा। अदालत ने 25 अगस्त 2025 के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। यह आदेश आरोपी को दोषी ठहराने का फैसला नहीं है।

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