45 घंटे बाद खत्म हुई बिजली कर्मचारियों की हड़ताल, सरकार के सामने झुकने पड़े 5 बड़े दबाव

4
Haryana Electricity Strike

बिजली संकट से कई जिलों में बढ़ी परेशानी

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने आम लोगों से लेकर औद्योगिक इकाइयों तक की मुश्किलें बढ़ा दीं। कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरों में पानी की सप्लाई प्रभावित हुई, वहीं उद्योगों के कामकाज पर भी असर पड़ा। लंबे समय तक बिजली नहीं मिलने से परेशान लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा। लगातार बढ़ती परेशानी ने सरकार के सामने जल्द समाधान निकालने की चुनौती खड़ी कर दी।

फरीदाबाद से अचानक पंचकूला पहुंचे मुख्यमंत्री

बढ़ते विरोध और बिजली संकट के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार शाम फरीदाबाद से अचानक पंचकूला पहुंचे। यहां उन्होंने कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों और विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में समाधान निकालने के लिए सरकार की ओर से कुछ अहम आश्वासन दिए गए।

HERC के फैसले की समीक्षा का मिला भरोसा

सरकार ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के फैसले की समीक्षा कराने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात भी कही गई। इन आश्वासनों के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।

इन 5 फैक्टर ने बढ़ाई सरकार की चुनौती

1. कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित होना: हड़ताल के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ा।

2. पेयजल आपूर्ति में परेशानी: बिजली संकट के चलते घरों में पानी पहुंचाने वाली व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। इससे लोगों की दैनिक जरूरतें पूरी करना मुश्किल हुआ।

3. उद्योगों पर असर: बिजली की अनियमित आपूर्ति ने औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित किया। इससे कामकाज जारी रखने की चुनौती बढ़ी।

4. जनता का बढ़ता विरोध: बिजली और पानी की समस्या से परेशान लोगों के सड़कों पर उतरने से प्रशासन पर जल्द स्थिति संभालने का दबाव बढ़ा।

5. निजी कंपनी के लाइसेंस का विवाद: कर्मचारियों की मांगों में निजी कंपनी के लाइसेंस से जुड़ा मुद्दा प्रमुख रहा। सरकार को HERC के फैसले की समीक्षा और कानूनी कार्रवाई का आश्वासन देकर समाधान की दिशा तलाशनी पड़ी।

45 घंटे बाद समाप्त हुई हड़ताल

सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के बाद करीब 45 घंटे से जारी हड़ताल खत्म हो गई। इससे बिजली व्यवस्था सामान्य करने की दिशा में रास्ता खुला। हालांकि, HERC के फैसले की समीक्षा और निजी कंपनी के लाइसेंस को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया इस विवाद के महत्वपूर्ण पहलू बने रहेंगे।

Loading