HERC को मिले कई सुझाव, लोगों ने दरें न बढ़ाने की मांग उठाई; गुरुग्राम से जनसुनवाई की शुरुआत
हरियाणा में बिजली की दरों को लेकर आम जनता की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। राज्य के लोग नहीं चाहते कि बिजली के दामों में कोई बढ़ोतरी की जाए। इस संबंध में हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (HERC) के पास कई प्रस्ताव और आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। लोगों का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं पर बिजली दरें बढ़ाना अतिरिक्त बोझ साबित होगा।
HERC के चेयरमैन ने स्पष्ट किया है कि बिजली दरों को लेकर कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा। आयोग पूरे प्रदेश से उपभोक्ताओं की राय लेगा और सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इस प्रक्रिया की शुरुआत गुरुग्राम से की जा रही है, जहां पहली जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।
चेयरमैन के अनुसार, आयोग का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना है। बिजली कंपनियों की ओर से टैरिफ बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव जरूर आए हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की सहमति और प्रतिक्रिया के बिना कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की राय समान रूप से महत्वपूर्ण है।
जनसुनवाई के दौरान घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता अपने सुझाव और आपत्तियां सीधे आयोग के सामने रख सकेंगे। कई सामाजिक संगठनों और उपभोक्ता मंचों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ हैं। उनका तर्क है कि बिजली वितरण कंपनियों की अक्षमता और लाइन लॉस का बोझ आम जनता पर नहीं डाला जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बिजली दरें बढ़ती हैं तो इसका असर छोटे व्यापारियों, मध्यम वर्ग और किसानों पर ज्यादा पड़ेगा। यही कारण है कि इस मुद्दे पर लोगों की भागीदारी और राय लेना जरूरी हो गया है।
HERC ने संकेत दिए हैं कि गुरुग्राम के बाद अन्य जिलों में भी जनसुनवाई की जाएगी। सभी जिलों से सुझाव मिलने के बाद ही बिजली टैरिफ पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, प्रदेश में यह साफ संदेश गया है कि जनता बिजली दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं है और अपनी आवाज मजबूती से उठा रही है।
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