डिजिटल अपराध पर शिकंजा, तकनीकी सुरागों से पकड़े गए ठग

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फर्जी सिम और मोबाइल से चला रहे थे साइबर ठगी का नेटवर्क, जांच में मिले ठोस प्रमाण

हरियाणा के नूंह जिले में पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर ऑनलाइन ठगी के जरिए लोगों से पैसे ऐंठने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की वारदातों में किया जा रहा था। जांच के दौरान मोबाइल में मिले स्क्रीनशॉट और डिजिटल डेटा को अहम सबूत माना जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को फोन कॉल और मैसेज के जरिए जाल में फंसाते थे। कभी खुद को बैंक कर्मी बताकर तो कभी किसी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर वे पीड़ितों से ओटीपी और निजी जानकारी हासिल कर लेते थे। इसके बाद खातों से रकम निकाल ली जाती थी। शिकायतें मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की।

जांच के दौरान संदिग्ध मोबाइल नंबरों और लेनदेन की कड़ियां नूंह क्षेत्र से जुड़ती पाई गईं। इसके बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी और दोनों आरोपियों को काबू कर लिया। तलाशी के दौरान कई फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल फोन और ठगी से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड बरामद हुआ। मोबाइल में मौजूद स्क्रीनशॉट से यह साफ हुआ कि आरोपी ठगी की रकम और पीड़ितों की जानकारी का पूरा हिसाब रखते थे।

पुलिस का कहना है कि बरामद साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया और कुल कितनी रकम की धोखाधड़ी की गई।

वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराध के मामलों में डिजिटल सबूत बेहद अहम होते हैं और इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया जाएगा। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि साइबर ठगों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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