मुनक नहर से राजधानी को अतिरिक्त जल आपूर्ति, ई-फ्लो व्यवस्था लागू
यमुना जल को लेकर केंद्र सरकार के नए निर्णय ने हरियाणा की चिंता बढ़ा दी है। ताजा व्यवस्था के तहत मुनक नहर से 100 क्यूसेक पानी दिल्ली की ओर भेजा जाएगा। इसके साथ ही यमुना नदी में ‘ई-फ्लो’ यानी पर्यावरणीय प्रवाह का नया सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस फैसले को जल संरक्षण के लिहाज से अहम माना जा रहा है, लेकिन हरियाणा में इसे राज्य के जल हितों के लिए झटका बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, ई-फ्लो सिस्टम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यमुना में सालभर न्यूनतम मात्रा में पानी बहता रहे, जिससे नदी का प्राकृतिक संतुलन और जलीय जीवन सुरक्षित रह सके। इसके लिए अलग-अलग मौसम में तय मात्रा में पानी छोड़ा जाएगा। इसी योजना के तहत मुनक नहर से दिल्ली को अतिरिक्त 100 क्यूसेक पानी देने का निर्णय लिया गया है।
हरियाणा के अधिकारियों और जल विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से ही राज्य को सिंचाई और पीने के पानी की जरूरतों के लिए सीमित जल उपलब्ध है। ऐसे में दिल्ली को अतिरिक्त पानी दिए जाने से खासकर गर्मी के मौसम में किसानों और ग्रामीण इलाकों पर असर पड़ सकता है। राज्य में यमुना पर निर्भर कई क्षेत्रों में पहले ही जल संकट की स्थिति बनी रहती है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार और पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों का तर्क है कि ई-फ्लो व्यवस्था लंबे समय में सभी राज्यों के लिए फायदेमंद साबित होगी। नदी में लगातार पानी बहने से प्रदूषण का स्तर कम होगा और जल गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही भविष्य में जल विवादों को भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
हरियाणा सरकार की ओर से इस फैसले का अध्ययन किया जा रहा है और केंद्र से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। राज्य यह भी चाहता है कि ई-फ्लो लागू करते समय उसकी सिंचाई और पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के बीच बातचीत तेज होने की संभावना है। यमुना जल पर लिया गया यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और राज्यों के जल अधिकारों के बीच संतुलन की नई बहस छेड़ रहा है।
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