हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने सरकार के एक प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए उसे रोकने की बात कही है। उनका कहना है कि फ्रीहोल्ड से जुड़ी नीति तैयार करते समय उनसे कोई चर्चा नहीं की गई और बिना उचित विचार-विमर्श के प्रस्ताव तैयार किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता के हितों से जुड़े मामलों में वह किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
मंत्री विज ने कहा कि यदि किसी नीति का सीधा प्रभाव आम लोगों पर पड़ता है, तो उसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों की राय लेना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित प्रस्ताव में कई ऐसे बिंदु हैं, जिन पर पुनर्विचार की जरूरत है। इसलिए उन्होंने इसे तत्काल प्रभाव से रोकने की बात कही।
उन्होंने कहा कि वह जनता के हितों की रक्षा के लिए हमेशा खड़े रहेंगे। अपने बयान में उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह जनता के अधिकारों के लिए पूरी मजबूती से संघर्ष करेंगे। उनका कहना था कि किसी भी नीति का उद्देश्य लोगों को राहत देना होना चाहिए, न कि उन्हें परेशान करना।
मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। सरकार की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव से जुड़े बिंदुओं पर आगे विचार-विमर्श किया जा सकता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित प्रस्ताव की समीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यदि आवश्यक हुआ तो विभागीय स्तर पर इसमें संशोधन या स्पष्टीकरण भी किया जा सकता है।
फिलहाल मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आगे सरकार की ओर से लिए जाने वाले निर्णय और आधिकारिक रुख पर सभी की नजर बनी हुई है।
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