कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले हरियाणा के बॉक्सर अंकुश ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कई भावुक बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में ट्रेनिंग के दौरान साथी खिलाड़ी उन्हें ‘बौना’ कहकर चिढ़ाते थे, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे।
अंकुश ने बताया कि बॉक्सिंग करियर की शुरुआत आसान नहीं थी। पहले मुकाबले में हार मिलने के बाद वह काफी निराश हो गए थे। उस समय उनके पिता ने उन्हें हिम्मत दी और हार से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पिता के प्रोत्साहन ने उन्हें दोबारा आत्मविश्वास के साथ रिंग में उतरने का साहस दिया।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों और मेहनत के दम पर ही वह आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उनका मानना है कि किसी भी खिलाड़ी को आलोचनाओं से घबराने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए। यही सोच उन्हें सफलता तक लेकर गई।
कॉमनवेल्थ में गोल्ड मेडल जीतने के बाद जब अंकुश अपने गांव पहुंचे तो उनका भव्य स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया और उनकी उपलब्धि पर गर्व जताया। इस खुशी के मौके पर पूरे गांव के लिए दावत का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
अंकुश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कोच और पूरे परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के सहयोग और विश्वास के बिना यह उपलब्धि हासिल करना संभव नहीं था। उनका अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए और पदक जीतना है।
फिलहाल अंकुश की सफलता पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है। उनका संघर्ष और उपलब्धि यह संदेश देती है कि आत्मविश्वास, मेहनत और परिवार का साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
![]()











