रोहतक: हरियाणा के रोहतक में ‘थारा फूफा जिंदा है’ अभियान चलाकर चर्चा में आए दुलीचंद का 106 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शनिवार शाम अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार गांव गांधरा में किया जाएगा। दुलीचंद अपने पीछे 10 बच्चों और करीब 70 सदस्यों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। पेंशन कटने के विरोध में उनके अनोखे प्रदर्शन ने उन्हें प्रदेशभर में पहचान दिलाई थी।
102 साल की उम्र में काट दी गई थी पेंशन
दुलीचंद करीब चार साल पहले उस समय सुर्खियों में आए थे, जब 102 साल की उम्र में सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाकर उनकी पेंशन बंद कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने खुद को जिंदा साबित करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया।
दुलीचंद दूल्हे की तरह सजकर रथ पर बैठे और रोहतक में डीसी कार्यालय तक बारात निकाली। उनके इस प्रदर्शन में कई अन्य बुजुर्ग भी शामिल हुए, जिनकी पेंशन जिंदा होने के बावजूद बंद कर दी गई थी।
सनग्लासेज लगाकर रथ पर निकले थे दुलीचंद
दुलीचंद के प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो काफी चर्चा में रहे थे। वह रथ पर बैठकर सनग्लासेज लगाए नजर आए थे। उनके हाथों में ‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ लिखी तख्तियां थीं। इस अनोखे विरोध के जरिए उन्होंने प्रशासन का ध्यान अपनी समस्या की ओर खींचा था।
उनके साथ शामिल अन्य बुजुर्गों ने भी अपनी पेंशन दोबारा शुरू कराने की मांग उठाई थी। प्रदर्शन के दौरान बुजुर्गों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं।
अधिकारियों ने दोबारा शुरू की थी पेंशन
दुलीचंद के प्रदर्शन के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंचा। विरोध बढ़ने पर प्रशासन की ओर से कैंप लगाया गया, जिसमें दुलीचंद समेत अन्य प्रभावित लोगों की पेंशन दोबारा शुरू की गई थी।
पेंशन से जुड़े इस मामले में दुलीचंद का तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना और ‘थारा फूफा जिंदा है’ नारा उनकी पहचान बन गया।
70 सदस्यों का परिवार छोड़ गए दुलीचंद
106 साल की उम्र में दुलीचंद के निधन की खबर से उनके परिवार और परिचितों में शोक है। उनके परिवार में 10 बच्चे हैं और कुल मिलाकर करीब 70 सदस्य हैं। उनका अंतिम संस्कार गांधरा गांव में किया जाएगा।
दुलीचंद को उस बुजुर्ग के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए अनोखा विरोध दर्ज कराया और सरकारी रिकॉर्ड में खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई के कारण प्रदेशभर में पहचान बनाई।
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