गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के संभावित निजीकरण को लेकर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। आयोग ने समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, विशेषज्ञ समिति बिजली वितरण व्यवस्था, तकनीकी पहलुओं, उपभोक्ताओं के हितों और संबंधित सभी पक्षों की आपत्तियों एवं सुझावों का अध्ययन करेगी। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आयोग आगे का निर्णय लेगा। इस कारण फिलहाल निजीकरण की प्रक्रिया पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।
आयोग ने संबंधित निजी कंपनी को भी प्रक्रिया के तहत 30 लाख रुपये अग्रिम (Advance) जमा कराने के निर्देश दिए हैं। यह राशि नियामकीय प्रक्रिया और विशेषज्ञ समिति से संबंधित आवश्यक कार्यों के लिए निर्धारित की गई है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि कंपनी को अंतिम लाइसेंस या संचालन की अनुमति मिल गई है।
इस मामले को लेकर पहले भी कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनका कहना है कि बिजली वितरण व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी हितधारकों की राय और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
फिलहाल HERC विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद आयोग सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए अंतिम निर्णय लेगा। तब तक गुरुग्राम और नूंह में बिजली निजीकरण को लेकर स्थिति यथावत बनी रहेगी।
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