नागक्षेत्र सरोवर में मछलियों के मरने का सिलसिला जारी वीरवार को भी मरी सैंकड़ों मछलियां पालिका ने मरी मछलियों को सरोवर से बाहर निकलवाया बदबू से श्रद्धालु बेहाल, प्रशासन ने नहर से डलवाया पानी

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Nagakshetra Sarovar,
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था के केंद्र नागक्षेत्र सरोवर में इन दिनों भयावह स्थिति बनी हुई है। सरोवर में लगातार मछलियों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को भी सैकड़ों मछलियां मृत अवस्था में पानी की सतह पर तैरती दिखाई दीं, जिससे पूरे क्षेत्र में बदबू फैल गई और श्रद्धालुओं को मुंह पर कपड़ा रखकर वहां से गुजरना पड़ा। इस सरोवर की वर्तमान स्थिति ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जाता है कि यह सरोवर महाभारतकालीन है और यहां पर राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय द्वारा सर्पदमन यज्ञ किया गया था और 5000 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। लेकिन अब यह सरोवर प्रदूषण और लापरवाही की मार झेल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और सफीदों प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है तथा मछलियों की मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इससे पहले भी जनवरी माह में बड़ी संख्या में मछलियां मरी थीं, लेकिन उसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मत्स्य पालन विभाग ने मछलियों के सैंपल लेकर जांच के लिए हिसार स्थित लैब में भेज दिए हैं। हालांकि अब तक मछलियों की मौत का सटीक कारण सामने नहीं आया है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट में पानी के अत्यधिक दूषित होने और उसमें अमोनिया की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ने की बात सामने आई है।
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ताजा पानी की कमी बनी मुख्य वजह
जानकारों के अनुसार सरोवर में ताजा पानी की आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई है, जो इस समस्या की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। पहले नहर से मोरी के माध्यम से नियमित रूप से पानी सरोवर में पहुंचता था, लेकिन नहरी विभाग द्वारा पास में पुल निर्माण के दौरान इस मोरी को बंद कर दिया गया। इसके बाद से सरोवर में पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया। वहीं दूसरी ओर नगर पालिका द्वारा संजय पार्क के पास बनाए गए नाले से भी सरोवर में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे सरोवर का पानी स्थिर और दूषित होता चला गया, जिससे ऑक्सीजन की कमी पैदा हो गई और मछलियां दम तोड़ने लगीं।
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हांसी ब्रांच नहर से डाला जा रहा पानी
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सफीदों प्रशासन ने फिलहाल अस्थायी कदम उठाते हुए हांसी ब्रांच नहर में मोटर पंप लगाकर सरोवर में ताजा पानी डालना शुरू किया है। प्रशासन का मानना है कि इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा और मछलियों की मौत का सिलसिला कुछ हद तक रोका जा सकेगा।
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श्रद्धालुओं की आस्था भी बनी वजह
वहीं मत्स्य पालन विभाग ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे सरोवर में अत्यधिक मात्रा में आटा न डालें। विभाग के अनुसार, जब श्रद्धालु बड़ी मात्रा में आटा सरोवर में डालते हैं, तो वह पानी की तली में जाकर सड़ने लगता है। इससे पानी में अमोनिया का स्तर तेजी से बढ़ता है, जो मछलियों के लिए घातक साबित होता है।
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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सरोवर कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड के अधीन है। बोर्ड द्वारा समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, जिससे स्थिति बिगड़ती चली गई। यदि पहले ही पानी की आपूर्ति और सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता, तो शायद यह नौबत नहीं आती।
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स्थायी समाधान की उठी मांग
नागक्षेत्र सरोवर की यह स्थिति अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु मांग कर रहे हैं कि सरोवर में नियमित रूप से स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, साथ ही जल निकासी और सफाई की व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जाए।

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