गुरुग्राम जलभराव पर CM सैनी से मिले राव इंद्रजीत, ड्रेनेज के लिए भूमिगत सुरंगों का दिया सुझाव

1
Gurugram Waterlogging

गुरुग्राम में बारिश के बाद हुए जलभराव और ट्रैफिक अव्यवस्था को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। बैठक में गुरुग्राम की जल निकासी व्यवस्था और बार-बार होने वाले जलभराव को लेकर चर्चा हुई। राव इंद्रजीत ने कहा कि लापरवाही को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाना चाहिए। उन्होंने पानी की निकासी के स्थायी समाधान के लिए मेट्रो की तर्ज पर भूमिगत सुरंगें बनाने का सुझाव भी दिया।

गुरुग्राम में हाल की बारिश के बाद कई प्रमुख सड़कों और निचले इलाकों में भारी जलभराव की स्थिति सामने आई थी। इससे शहर का यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।

कई किलोमीटर लंबे जाम में वाहन फंसे रहे। स्कूल बसों, ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

गुरुग्राम देश के प्रमुख कॉर्पोरेट और आईटी केंद्रों में शामिल है। ऐसे में हर मानसून में जलभराव की तस्वीरें सामने आने से शहर के बुनियादी ढांचे पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। बैठक में समस्या के तात्कालिक और दीर्घकालिक समाधान पर चर्चा की गई।

राव इंद्रजीत ने कहा कि जलभराव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब होना चाहिए। बारिश से पहले की गई तैयारियों और ड्रेनेज की सफाई की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करने की जरूरत है।

उन्होंने यह पता लगाने पर जोर दिया कि संबंधित विभागों की तैयारियों के बावजूद शहर में इतनी गंभीर स्थिति क्यों बनी।

गुरुग्राम में नगर निगम, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण और अन्य एजेंसियां अलग-अलग क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी संभालती हैं। ऐसे में विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राव इंद्रजीत ने जल निकासी के लिए एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर समाधान का सुझाव दिया। उनका कहना है कि गुरुग्राम में मेट्रो जैसी भूमिगत सुरंगों के जरिए बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।

ऐसी सुरंगों का उद्देश्य भारी बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी को जलभराव वाले क्षेत्रों से तेजी से बाहर निकालना हो सकता है।

हालांकि इस तरह की परियोजना को जमीन पर उतारने से पहले तकनीकी व्यवहार्यता, लागत, भूजल, मौजूदा भूमिगत ढांचे और पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत अध्ययन जरूरी होगा।

गुरुग्राम में मेट्रो, सीवर, पानी, बिजली और दूरसंचार से संबंधित कई भूमिगत नेटवर्क मौजूद हैं। नई सुरंगों की योजना बनाते समय इन सभी संरचनाओं को ध्यान में रखना होगा।

शहर के प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की स्थिति भी इस समस्या से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू है। तेजी से हुए शहरीकरण और निर्माण के कारण पानी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।

जलभराव के स्थायी समाधान के लिए केवल नालों की सफाई के बजाय पूरे शहर की ड्रेनेज क्षमता का आकलन करने की आवश्यकता हो सकती है।

बारिश के दौरान जिन स्थानों पर हर साल पानी जमा होता है, उनकी पहचान कर अलग-अलग इंजीनियरिंग समाधान तैयार किए जा सकते हैं।

बैठक में प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठने के बाद संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है। बारिश से पहले किए गए कार्यों और उन पर खर्च की भी समीक्षा हो सकती है।

राव इंद्रजीत की ओर से अधिकारियों से जवाब-तलबी की बात ऐसे समय कही गई है जब गुरुग्राम के जलभराव को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं।

कांग्रेस ने जलभराव को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है, जबकि भाजपा से जुड़े नेताओं ने शहर की पुरानी प्लानिंग और पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों को भी समस्या के लिए जिम्मेदार बताया है।

राजनीतिक बहस से अलग गुरुग्राम के निवासियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल समस्या का स्थायी समाधान है। हर साल बारिश के दौरान घंटों जाम और सड़कों पर जमा पानी शहर की सामान्य गतिविधियों को प्रभावित करता है।

अब मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के बाद प्रशासन की ओर से कौन से तत्काल कदम उठाए जाते हैं और भूमिगत सुरंगों के प्रस्ताव पर तकनीकी स्तर पर विचार होता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।

फिलहाल राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने गुरुग्राम के जलभराव का मुद्दा उठाते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में पानी की तेज निकासी के लिए मेट्रो की तर्ज पर भूमिगत सुरंगों जैसे स्थायी समाधान पर काम करने की जरूरत बताई है।

Loading