हरियाणा की सियासत में समानांतर सत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नेता विपक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में उनसे पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट जवाब देने को कहा गया है, ताकि स्थिति को सही तरीके से समझा जा सके।
सूत्रों के अनुसार, समानांतर बैठक आयोजित करने को लेकर संवैधानिक और प्रक्रियात्मक सवाल खड़े हो गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने अपने नोटिस में उम्मीद जताई है कि संबंधित पक्ष जल्द ही जवाब देगा और मामले को स्पष्ट करेगा। इस कदम को सदन की गरिमा और नियमों को बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। मुख्य सचिव से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। सरकार यह जानना चाहती है कि किन परिस्थितियों में यह स्थिति उत्पन्न हुई और इसमें किस-किस की भूमिका रही। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को भी दर्शाता है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं, जिससे माहौल और अधिक गरमाता जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष की इस कार्रवाई को नियमों के पालन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता आने की संभावना है, खासकर तब जब संबंधित पक्ष अपना पक्ष रखेगा और प्रशासन अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
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