हरियाणा में विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को अब भी नौकरी सुरक्षा को लेकर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिल पाया है। राज्य सरकार द्वारा 56 हजार 813 कर्मचारियों का डेटा सत्यापित किए जाने के बाद भी नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा का मुद्दा अधर में बना हुआ है। इस बीच सरकार ने मामले पर आगे की प्रक्रिया तय करने के लिए एक को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया है, जिसे 15 जून तक अपनी रिपोर्ट और सुझाव देने का समय दिया गया है।
जानकारी के अनुसार लंबे समय से संविदा, आउटसोर्स और अन्य श्रेणियों में कार्यरत कर्मचारी नौकरी सुरक्षा और स्थायी नीति की मांग कर रहे हैं। सरकार ने पहले कर्मचारियों का डेटा सत्यापन अभियान चलाया था, जिसके तहत विभिन्न विभागों से कर्मचारियों का रिकॉर्ड जुटाया गया। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि जल्द कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि अब तक स्थायी नौकरी सुरक्षा या नियमितीकरण को लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। इसे लेकर कर्मचारी संगठनों में असंतोष बना हुआ है। कई कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
सरकार द्वारा गठित को-ऑर्डिनेशन कमेटी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा करेगी। समिति यह भी तय करेगी कि किन श्रेणियों के कर्मचारियों को किस प्रकार राहत दी जा सकती है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक समिति की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार आगे की नीति पर निर्णय लेगी। वहीं कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस बार ठोस कदम उठाएगी और लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान करेगी। फिलहाल सभी की निगाहें 15 जून तक आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
![]()











