चंडीगढ़: हरियाणा में नकली और घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदेश में 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक कुल 2,389 दवाओं के सैंपल लिए गए। इनमें से 2,189 सैंपलों की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में 11 सैंपल तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें सब-स्टैंडर्ड घोषित किया गया।
दवा कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ 64 FIR
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली दवा कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ 64 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। वहीं, अदालतों में चल रहे 15 मामलों का फैसला भी आया है। इनमें आठ मामलों में आरोपियों को सजा सुनाई गई, जबकि सात मामलों में आरोपी बरी हो गए।
वर्तमान में दवाओं की गुणवत्ता और नियमों के उल्लंघन से जुड़े 462 मामले अदालतों में लंबित हैं। विभाग की ओर से इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
70 लाख रुपये के नकली मौनजारो इंजेक्शन जब्त
नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एफडीए की टीम ने अप्रैल 2026 में करीब 70 लाख रुपये कीमत के नकली वजन घटाने और डायबिटीज नियंत्रित करने वाले मौनजारो इंजेक्शन जब्त किए थे। इस कार्रवाई के बाद दवा बाजार में नकली इंजेक्शन की आपूर्ति को लेकर भी चिंता सामने आई थी।
टेल्मा-एएम की नकली दवा बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश
जुलाई 2026 में एफडीए गुरुग्राम की टीम ने ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मा-एएम की नकली दवा बनाने और बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस कार्रवाई में नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री से जुड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आई।
दवाओं की गुणवत्ता जांच पर विभाग का जोर
दवाओं के सैंपल लेने, उनकी प्रयोगशाला में जांच कराने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के जरिए स्वास्थ्य विभाग दवा बाजार की निगरानी कर रहा है। हालांकि, अदालतों में लंबित 462 मामले बताते हैं कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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