हिसार एयरपोर्ट पर बनेगा ड्रोन-हेलिकॉप्टर रिपेयर हब, 15 साल की लीज पर दिए जाएंगे 3 बड़े हैंगर; सरकार को मिलेगा राजस्व

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Hisar Airport

हिसार एयरपोर्ट पर विमानन क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में नई पहल की जा रही है। यहां ड्रोन और हेलिकॉप्टर की मरम्मत तथा रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके लिए हरियाणा एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HADCL) एयरपोर्ट के तीन बड़े हैंगर को 15 साल के लिए लीज पर देने की तैयारी कर रहा है।

इस योजना का उद्देश्य हिसार एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का व्यावसायिक उपयोग बढ़ाने के साथ विमानन क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को यहां आकर्षित करना है। हैंगर का इस्तेमाल ड्रोन और हेलिकॉप्टर की रिपेयर, मेंटेनेंस तथा इससे संबंधित तकनीकी गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।

तीन बड़े हैंगर निजी या पात्र विमानन संस्थाओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लीज पर दिए जाने की योजना है। इससे सरकार को लीज और संबंधित गतिविधियों के जरिए राजस्व मिलने की उम्मीद है।

हिसार एयरपोर्ट को केवल यात्री उड़ानों तक सीमित रखने के बजाय विमानन से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी विकसित करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा सकता है। ड्रोन और हेलिकॉप्टर की मरम्मत की सुविधा विकसित होने से एयरपोर्ट पर तकनीकी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

इस तरह की सुविधाओं के संचालन के लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों, इंजीनियरों और अन्य सहायक स्टाफ की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में परियोजना स्थानीय स्तर पर रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा कर सकती है। हालांकि रोजगार की वास्तविक संख्या संबंधित कंपनियों के निवेश और संचालन के स्तर पर निर्भर करेगी।

ड्रोन का उपयोग कृषि, सर्वेक्षण, मैपिंग, निगरानी और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे में इनके रखरखाव और तकनीकी सेवाओं की मांग भी बढ़ने की संभावना है। हिसार में रिपेयर सुविधा उपलब्ध होने से इस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को नया केंद्र मिल सकता है।

इसी तरह हेलिकॉप्टर की मेंटेनेंस और रिपेयर से जुड़ी गतिविधियों के लिए आवश्यक तकनीकी मानकों और विमानन नियमों का पालन करना होगा। संबंधित कंपनियों को लागू नागरिक उड्डयन नियमों और आवश्यक अनुमतियों के अनुसार ही सेवाएं संचालित करनी होंगी।

15 साल की लंबी लीज अवधि से चयनित कंपनियों को स्थायी बुनियादी ढांचा और उपकरण विकसित करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकता है। वहीं सरकार के लिए एयरपोर्ट की संपत्तियों से दीर्घकालिक राजस्व हासिल करने का रास्ता खुलेगा।

लीज की शर्तें, कंपनियों के चयन की प्रक्रिया, किराया और निवेश से जुड़े विस्तृत प्रावधान HADCL की आधिकारिक निविदा या संबंधित दस्तावेजों से स्पष्ट होंगे।

हिसार एयरपोर्ट पर यदि ड्रोन और हेलिकॉप्टर रिपेयर गतिविधियां बड़े स्तर पर शुरू होती हैं तो इससे आसपास विमानन से जुड़े सहायक कारोबार विकसित होने की संभावना भी बन सकती है।

फिलहाल HADCL की ओर से हिसार एयरपोर्ट के तीन बड़े हैंगर 15 साल की लीज पर देने की योजना सामने आई है। इनका उपयोग ड्रोन और हेलिकॉप्टर की रिपेयर तथा मेंटेनेंस के लिए किए जाने की तैयारी है। इससे एयरपोर्ट की व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने के साथ सरकार के लिए राजस्व का नया स्रोत तैयार होने की उम्मीद है।

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